लेन्स
दो गोलीय या एक गोलीय एवं सक समतल सतह से शीशे के बने प्रकाशिक यंत्र (Optical Instrument) को लेंस कहते है।
दो गोलीय सतहों वाले लेन्स को अवतल तथा उत्तल में वर्गीकृत किया जाता है।
अवतल तथा उत्तल लेन्स में दो वक्रता केन्द्र तथा दो फोकस होते हैं।
लेन्सों की आपतित किरणों को मोड़ने की क्षमता को उसकी शक्ति कहते हैं। लेन्स की शक्ति लेन्स के फोकस के व्युत्क्रम के बराबर होता है। (P = 1/f) लेन्स की शक्ति का मात्रक डाइआॅप्टर (Diopter) होता है, जिसे d द्वारा सूचित किया जाता है।
दो लेन्सों को आपस में जोड़ देने पर परिणामी लेन्स की क्षमता दोनों की शक्ति के योग के बराबर होता है। (P = P1+P2)
समान फोकस दूरी वाले एक अवतल एवं एक उत्तल लेन्स को जोड़ने पर उसकी शक्ति शून्य तथा फोकस दूरी अनन्त हो जाती है।
उत्तल लेन्स
इसके दोनों सतह उभरे होते हैं।
शीर्ष का भाग संकरा तथा बीच का भाग चैड़ा होता है।
इसका प्रधान फोकस धनात्मक होता है। अतः इसकी क्षमता भी धनात्मक होती है।
इसमें किसी वस्तु की प्रतिबिम्ब की स्थिति एवं प्रकृति वैसी ही है जैस अवतल दर्पण में होता है।
उपयोग-
कैमरा, सूक्ष्मदर्शी, दूरदर्शी तथा दूर-दृष्टि दोष वाले व्यक्ति के चश्मे में।