• सरकार 12 बैंकों को 48,239 करोड़ रुपए की पूंजी उपलब्ध कराएगी। जिन सरकारी बैंकों को यह रकम दी जाएगी, उनमें ज्यादातर को रिजर्व बैंक ने तत्काल सुधार श्रेणी (पीसीए) में रखा है।
• मोटे अनुमान के तौर पर पूंजी मिलने से इन बैंकों की कर्ज देने की क्षमता 4 से 5 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ जाएगी। छोटे कारोबारी लंबे समय से कर्ज में दिक्कतों की शिकायत कर रहे हैं। नए कर्ज से इकोनॉमी में भी तेजी आने की उम्मीद है।
• वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने बताया कि 48,239 करोड़ रुपए के बाद इस साल सरकारी बैंकों को 1,00,958 करोड़ रु. मिल जाएंगे। 5,000 करोड़ बैंक ऑफ बड़ौदा के लिए रखे गए हैं। इसमें देना और विजया बैंक का विलय हो रहा है। जरूरत पड़ने पर बैंक ऑफ बड़ौदा को यह रकम दी जाएगी।
• कॉरपोरेशन बैंक को सबसे ज्यादा 9,086 और इलाहाबाद बैंक को 6,896 करोड़ मिलेंगे। सचिव ने इसकी वजह भी बताई। पीसीए में होने के बावजूद दोनों बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
• रकम मिलने के बाद इनका पूंजी अनुपात बढ़ जाएगा। नेट एनपीए 6% से नीचे आ जाएगा। ग्रॉस एनपीए में से प्रोविजनिंग वाला एनपीए निकालने के बाद नेट एनपीए बचता है। इसका 6% से अधिक होना पीसीए की शर्तों में एक है।