- वह घड़ी जो एक निश्चित समय अंतराल के बाद एक स्थिति व कला में दोहराई जाती है। उसे आवर्त गति कहते हैं।
- वह गति जिसमें कण अपनी साम्यावस्था के इधर-उधर गति करता है दोलन गति कहा जाता है।
- लोलक की साम्यावस्था से दूरी को विस्थापन कहते हैं
- साम्यावस्था से एक ओर चली गई अधिकतम दूरी को कण का आयाम कहते हैं।
- लोलक एक दोलन पूरा करने में जितना समय लेता है उसे उसका आवर्तकाल कहते हैं।
- लोलक एक सेकंड में जितने दोलन करता है उसे उसकी आवृत कहते हैं
- सरल लोलक वह समायोजन है जिसमें एक भारी लोलक को पूर्णता प्रत्यास्थ लंबाई में खींचने वाले तथा भार हीन धागे से बांधकर लटका दिया जाता है।
- जहां L धागे की लंबाई है
सेकंड लोलक का आवर्तकाल 2 सेकंड होता है।
तरंग एक विश्व में जो माध्यम की वास्तविक संचरण के बिना की एक स्थान से दूसरे स्थान तक ऊर्जा तथा संवेग का संचरण करता है।
यदि किसी क्षण बिछोोह, को माध्यम की केवल एक छोटी भाग तक सीमित रहता है तब यह कहा जाता है कि माध्यम के उस भाग में तरंग स्पन्द गतिमान है।
यह वे तिरंगे हैं, जिनमें माध्यम के गुण तरंग के चलने की दिशा के अनुदेश कंपन करते हैं इनकी आवृत कम तथा तरंग दैर्ध्य होती है।
इन का वेग कम होता है निर्वात में गत नहीं कर सकते हैं।