मौर्य राजवंश ( 322 ईसापूर्व - 185 ईसापूर्व )

मौर्य राजवंश

नास्तिक स्त्रोतों के अनुसार मोर्य क्षत्रिय वंश  से संबंधित थे। जबकि मौर्य शूद्र थे। इस  वंश का संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य था जिसे यूनानी इतिहासकारों ने सैन्ड्रोकोकस था। इस  305 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य ने सीरिया के यूनानी शासक सेल्यूकस को हराया और सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त मौर्य को निम्न चार प्रांतों  को दे दिए।

ऐरिए , अरोकाशिया, जेन्ड्रोशिया, पेरोपसिसडाई,

चंद्रगुप्त ने 500 हाथी सेलुकस को दे दिया तथा यूनानी राजकुमारी का विवाह और राज्य वंश में हुआ। मेगास्थनीज नामक यूनानी राजदूत  राज दरबार में युक्त हुआ जिसने इंडिका नामक पुस्तक लिखी मेगास्थनीज 305 ईसवी पूर्व से लेकर 299 ईसापूर्व तक भारत में रहा है।

इसमें लिखा है कि "भारत में दास प्रथा नहीं है, भारत में अकाल नहीं पड़ता, भारत में कुल 7 जातियां रहती हैं सबसे बड़ी जाति किसानों की है, और सबसे पवित्र व सम्मानित जाती पुरोहितों की तथा विद्वानों की मानी जाती है, और सबसे कम जनसंख्या वाली जाति सभासदों की है। भारत में विवाहित के समय कन्या मूल दिया जाता है जो 1 जोड़ी बैल होता है 298 इस अपूर्व के आसपास जैन साधु भद्रबाहु ने उत्तर भारत में 12 वर्ष के अकाल पड़ने की घोषणा की जिस कारण से चंद्र गुप्त मौर्य उत्तर भारत छोड़कर दक्षिण श्रवण वेल गोला और वहां पर सल्लेखना का प्रयोग करते हुए आत्महत्या कर लिया।

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