उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नीति की घोषणा 11 जुलाई 2000 में किया गया। इस जनसंख्या नीति में प्रत्यक्ष रुप से जनसंख्या में कमी लाने के स्थान पर गरीबी में कमी लाने तथा स्वास्थ सुविधाओं को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। इस जनसंख्या नीति में महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार, स्वास्थ सेवाओं में सुधार और सामुदायिक भागीदारी में सर्वाधिक महत्व दिया गया।
* इस जनसंख्या नीति में जनसंख्या पर किए जाने वाले व्यय 10% पंचायतों के माध्यम से किया जाएगा।
* परिवार कल्याण के लिए जनसंख्या कोष की स्थापना की जाएगी।
* वर्ष 2016 तक कुल प्रजनन दर 2.1 किया जाएगा।
* वर्ष 2016 तक लड़कियों की विवाह की औसत आयु 19.5 की जाएगी।
यद्यपि भारत सरकार जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए। वर्ष 2000 में एक राष्ट्रीय नीति प्रस्तुत की, जो ना केवल जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना चाहती है। बल्कि जनसंख्या के गुणवत्ता में भी सुधार लाना चाहती है। विभिन्न प्रकार के संस्थाओं का निर्माण जनसंख्या नीति की सफलता के लिए किया गया। इन सभी प्रयासों से यद्यपि दक्षिण-भारत के चारों राज्य जनसंख्या नीति को नियंत्रित करने में सफल रहे। परंतु उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे- राज्यों में जनसंख्या नीति की यह समस्या अभी भी बनी हुई है। अतः वर्ष 2000 जनसंख्या नीति भारत में पूरी तरह परिपेक्ष नहीं रही हैं। यद्यपि जनसंख्या वृद्धि की दर में कमी की प्रवृत्ति पाई गई है।