भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 ईस्वी के अनुसार भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान है जो निम्न प्रकार से प्राप्त की जा सकती है-
भारतीय नागरिकता जन्म से जिसका जन्म संविधान लागू होने के पश्चात अर्थात 26 जनवरी 1950 के पश्चात हुआ हो जन्म से भारत नागरिक होगा । अपवाद- राज नाईकों के बच्चे ,विदेशियों के बच्चे,
वंश परंपरा द्वारा नागरिकता -भारत के बाहर देश में 26 जनवरी 1950 ईस्वी के पश्चात जन्म लेने वाला व्यक्ति भारत नागरिक माना जाएगा यदि इसके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई भारत का नागरिक हो। निम्न वर्गों में आने वाले लोग पंजीकरण के द्वारा भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं ।
महिलाए जो भारतीय से विवाह कर चुकी है या भविष्यमें विवाह करेंगी।
भारतीय नागरिकों की नाबालिग बच्चे
राष्ट्रमंडल देशों की नागरिक जो भारत में रहते हैं या भारत सरकार की नौकरी कर रहा है आवेदन पत्र देकर भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं।
भूमि विस्तार द्वारा - यदि किसी भूभाग को भारत में शामिल किया जाता है तो उस क्षेत्र में निवास करने वाले को नागरिकता प्राप्त हो जाती है।
भारतीय नागरिकता संसोधन अधिनियम 1986 -इस अधिनियम के आधार पर भारतीय नागरिकता संशोधन अधिनियम 1955 निम्न में संशोधन किए गए-
भारत में जन्म लेने वाले में से केवल उसे ही नागरिकता प्रधान की जाएगी जिसके माता पिता में से एक भारत का नागरिक हो।
जो पंजीकरण के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्राप्त करना चाहते हैं उन्हें अब कम से कम पांच वर्षों तक निवास करना होगा पहले यह अवधि 6 माह थी।
देशीयकरण द्वारा नागरिकता तभी प्रदान की जाएगी जबकि संबंधित व्यक्ति कम से कम 10 वर्षो तक भारत में रह चुका हो।पहले यह अवधि 5 वर्ष थी नागरिकता संशोधन अधिनियम 1986 जम्मू कश्मीर असम सहित भारत के सभी राज्यों पर लागू होगा।