ऊष्मा - Heat (part 1)

ऊष्मा उर्जा का एक रूप है, जिसके कारण हमें गर्माहट का अनुभव होता है, कोई वस्तु कितनी गरम है, इसका मापन एक विशेष पैमाने के के द्वारा किया जाता है और यह माप तापमान (Temperature) कहां जाता है। ऊष्मा वह उर्जा है जिसके कारण तापमान उत्पन्न होता है। विभिन्न तापमान वाली दो वस्तुओं को परस्पर मिला देने पर ऊष्मा उर्जा अधिक तापमान वाली वस्तु से निकलकर कम तापमान वाली वस्तु मे प्रवाहित होता है। अतः तापमान वह राशि है जिससे ऊष्मा के प्रवाह की दिशा निर्धारित होता है। तापमान नापने का उपकरण थर्मामीटर  है।
प्रत्येक वस्तु को गर्म करने के लिये ऊष्मा देनी पडती है , और गर्म वस्तु जब ठंडी होता है तो ऊष्मा उर्जा निकलती है। किसी पदार्थ के एक किलोग्राम द्रव्यमान का तापमान 1°C तक बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा को उस पदार्थ की विशिष्ट ऊष्मा कहा जाता है।
ऊष्मा ऊर्जा की माप कैलोरी या किलोकैलोरी मे की कियाा जाता है। 1 ग्राम जल का तापमान 1°C तक बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा 1 कैलोरी होती है। एक कैलोरी ऊष्मा ऊर्जा लगभग 4.2 जूल कार्य कर सकती है। अतः आजकल उष्मा ऊर्जा को जूल मे व्यक्त किया जाता है, क्योंकि ऊर्जा का मात्रक जूल होता है।
जब किसी को ठोस पदार्थ को द्रव अवस्था मे अथवा द्रव से गैस अवस्था मे बदलना हो तो उसे ऊष्मा की आवश्यकता होती है। यह अतिरिक्त ऊष्मा केवल अवस्था परिवर्तन के लिए प्रयुक्त होती है, उसका ताप नही बढ़ता है। प्रति किलोग्राम पदार्थ के लिए आवश्यक ऊष्मा की अतिरिक्त मात्रा उस पदार्थ की गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) कहलाती है। गैस से द्रव अथवा दाब से ठोस में परिवर्तित होते समय ही यही गुप्त ऊष्मा, पदार्थ द्वारा त्याग दी जाता है।

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