ऊष्मा - Heat (part 2)

द्रव पदार्थ पर प्रत्येक ताप धीरे-धीरे वाष्प मे परिवर्तित होते रहते हैं। यह क्रिया वाष्पन (Evaporation) की प्रक्रिया कही जाती है। वाष्पन के लिए आवश्यक ऊष्मा ऊर्जा उसी पदार्थ मे से तथा उसके आसपास के वातावरण के द्वारा प्राप्त होती है । अतः वाष्पन के कारण ताप मे कमी होती है।
ऊष्मा का एक स्थान से दूसरे स्थान तक संचरण तीन विधियों के द्वारा होताा है - चालन (Conduction), संवहन (Convection) तथा विकिरण (Radiation)।

चालन( Conduction ):-

चालन, ऊर्जा संचालन की वह प्रक्रिया है, जिसमे द्रव्य (Matter) के अणु ऊष्मा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा देते हैं, परंतु उसके अणु स्वयं अपना स्थान छोड़कर दूसरे स्थान पर नहीँ जाते है।। उदाहरण - लोहे की छड़ को आग मे डालने पर लोहे का एक अणु गर्म होता है फिर दूसरा गर्म होता है, और फिर तीसरा, इस प्रकार अणु क्रमशः गर्म होते - होते ऊष्मा छड़ के हाथ वाले सिरे तक पहुंच जाता है।

संवहन( Convection ):-

इस विधि से तरल पदार्थ गर्म होता है। जब किसी की तरल पदार्थ (द्रव अथवा गैस) मे किसी एक स्थान का ताप दूसरे स्थान की अपेक्षा ऊँचा हो जाता है , तो उसके स्थान पर पदार्थ का घनत्व दूसरे स्थान की अपेक्षा कम हो जाता है। अतः पदार्थ के ऊंचे तापमान वाले को ऊपर उठने लगते हैं तथा उनका स्थान नीचे ताप वाले कण लेने लगते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि संपूर्ण धातु एक ही ताप पर नहीँ आ जाता। ऊष्मा संचरण की इस प्रक्रिया को जिसमे पदार्थ के कण स्थानांतरित होते हैं, इसे संवहन कहते हैं।
ठोसों मे तथा पारे मे ऊष्मा का संचरण केवल चालन द्वारा ही होता है, जबकि द्रवों , गैसो मे यह मुख्यतः संवहन द्वारा होता है ।(परन्तु द्रवों व गैसों में यह चालन द्वारा भी संभव होता है)

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