जय (JAI) [[ JAPAN,AMERICA ,INDIA]]

अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के बारे में कहा जाता है कि वैदेशिक संबंध कभी भी स्थिर नहीं होते क्योंकि राष्ट्रों के राष्ट्रहित ( National Interest ) बदलते रहते हैं । कभी बेहद करीब रहे  अमेरिका एवं चीन अब एक - दूसरे से दूर बैठे हैं जबकि कभी दूर - दूर रहे भारत एवं अमेरिका में पिछले कुछ वर्षों में नजदीकी संबंध कायम हुए हैं ।

• जय की आवश्यकता : बीते एक दशक में चीन की आक्रामक विदेश नीति से पूरा हिंद - प्रशांत ( Indo - Pacific ) क्षेत्र त्रस्त है । एवं उसी को संतुलित करने के लिये अमेरिका भारत से नजदीकी बढ़ा रहा है । ताजातरीन प्रकरण अर्जेंटीना के ब्यूनसआयर्स में आयोजित जी - 20 सम्मेलन का है जिसमें भारत , जापान एवं अमेरिका के राष्ट्राध्यक्षों ने एक दूसरे से मुलाकात की तथा लंबी चर्चा - परिचर्चा की । वैश्विक मीडिया इस उच्च स्तरीय बैठक को जय ( JAI - Japan America India ) का नाम दे रहा है ।
• पृष्ठभूमि : बीते एक दशक में एशिया के सबसे बड़े देश चीन ने हिंद - प्रशांत क्षेत्र , दक्षिण चीन सागर तथा अपनी पड़ोसी सरहदों में अपनी आक्रामकता के माध्यम से पड़ोसी देशों खासकर भारत तथा जापान के अतिरिक्त वियतनाम को सांसत में डाल दिया है । चीन लंबे समय से दक्षिण चीन सागर पर अपना एकाधिपत्य जमाने की फिराक में भी है । इसके अतिरिक्त चीन व्यापारिक तरीके से पूरे विश्व का सरताज बनने के भी फिराक में हैं । इन सब स्थितियों के मद्देनजर भारत , अमेरिका एवं जापान एक साथ आए हैं । गौरतलब है कि जय ( JAI ) सदस्यों की पहली उच्च स्तरीय बैठक जी - 20 सम्मेलन 2018 ( 30 नवंबर 2018 ) में अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में संपन्न हुई ।
• बैठक की मुख्य बातें :
1. बैठक में महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों तथा चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई ।
2. भारतीय प्रधानमंत्री ने साझा मूल्यों पर साथ मिलकर काम करने पर जोर देते हुए नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था के पालन किये जाने पर जोर दिया ।
3. आतंकवाद निरोध , समुद्री एवं साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर तीनों देशों में खुलकर बातचीत हुई ।
4. तीनों प्रतिनिधियों के बीच चीन के दक्षिण चीन सागर पर रूख तथा एशिया - प्रशांत क्षेत्र पर चीन के रूख की चर्चा हुई ।
5. प्रधानमंत्री मोदी ने साझा मूल्यों पर काम करने की प्रतिबद्धता के अतिरिक्त JAI का अर्थ जीत से लगाते । लगाते हुए इस बैठक को महत्वपूर्ण बताया ।

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