बाबर ( 1526 - 1530 ई . )बा
बाबर का पूरा नाम ज़हिर उद-दिन मुहम्मद बाबर था।इसका जन्म 1483 ई० में फरगना घाटी में हुुआ था। इनकी मृत्यु आगरा में 1530 ई० में हुई।
इनके पिता का नाम उमर शेख़ मिर्ज़ा तथा माता का नाम कुतलुग निग़ार ख़ानम है।
ये मुगल साम्राज्य का संस्थापक ,पानीपत के प्रथम युद्ध में उसने उज्बेकों की युद्ध नीति ‘तुलगमा युद्ध पद्धति' तथा तोपों को सजाने में ‘उस्मानी विधि' (रूमी विधि) का प्रयोग किया।
• ‘मिर्जा' की पैतृक उपाधि का त्याग कर 1507 ई . में काबुल विजय के उपलक्ष्य में 'बादशाह' की उपाधि धारण, खानुवा और चन्देरी युद्ध में 'जिहाद' घोषित किया , पानीपत युद्ध में विजय के उपलक्ष्य में काबुल के प्रत्येक निवासी को एक - एक चाँदी का सिक्का दान में देने के कारण उसे 'कलन्दर' भी कहा जाता है।
• तमगा नामक कर की समाप्ति , आगरा में ज्यामितीय विधि पर ‘नूरे अफगान' नामक बाग लगवाया , जिसे ' आरामबाग' (रामबाग) कहा जाता है ।
• सड़कों को नापने के लिए ‘गज-ए-बाबरी ' नामक माप का प्रयोग , काव्य संग्रह ' दीवान ' का तुर्की भाषा में संकलन , ‘ मुबइयान ' नामक पद्य शैली का विकास और ‘ रिसाल- ए -उसज ' की रचना की , जिसे ' खत - ए - बाबरी ' भी कहा जाता है । काबुल में चाँदी का ' शाहरुख ' तथा कन्धार में ‘ बाबरी ' नाम का सिक्का चलाया ।