अकबर के जीवन से संबंधित सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण तथ्य

अकबर ( 1542 - 1605 ई . )

1560 - 62 ई . में पर्दा शासन का अस्तित्व , 1562 ई . में दास प्रथा का अन्त , 1563 ई . में तीर्थ यात्रा कर की समाप्ति, 1564 ई . में जजिया कर की समाप्ति, 1571 ई में फतेहपुर सीकरी की स्थापना ( प्रारूप बहाउद्दीन ने तैयार किया ), 1575 ई . में  फतेहपुर सीकरी में इबादत खाने का निर्माण, 1578 ई . में इबादत खाने को सभी धर्मों के लिए खोला गया अर्थात् यह धर्म संसद बना।

1579 ई . में महजर या तथाकथित अमोघत्व की घोषणा , स्मिथ ने इसे इनफैविलिटी डिक्री कहा है।

1582 ई . में तौहीदे - इलाही की घोषणा , 1583 ई . में कुछ निश्चित दिनों पर पशुवध निषेध , 1584 ई . में गुजरात विद्रोह को दबाने के कारण अब्दुर्रहीम को ‘ खानखाना ' की उपाधि दी गयी ।

1575 - 76 ई . में सम्पूर्ण साम्राज्य 12 सूबों में बाँटा गया ( दक्षिण की विजय के बाद संख्या 15 हो गयी ), 1582 ई . में टोडरमल द्वारा दहसाला प्रणाली लागू , 1573 - 74 ई . में गुजरात विजय के बाद मनसबदारी प्रथा आरम्भ (प्रेरणा अब्बा सईद से प्राप्त की)।


• ‘ झरोखा दर्शन', तुलादान तथा 'पायबोस' जैसी पारसी परम्पराओं को आरम्भ किया, जैन धर्म के आचार्य ‘हरिविजय सूरि’ को ‘ जगतगुरु तथा जिनचन्द सूरि को ‘युग - प्रधान' की उपाधि दी थी।

• उसके दरबार में ईसाइयों का जेस्सुइट मिशन तीन बार आया जिसका प्रथम बार नेतृत्व कादर एकाबीवा ने किया था ।

1583 ई . में उसने मुद्रा पर सूर्य और चन्द्रमा की महिमा का बखान करने वाले पद्य अंकित कराये। मुद्रा को एक सुव्यवस्थित एवं व्यापक आधार दिया, 1577 ई० में दिल्ली में शाही टकसाल' बनवायी जिसका प्रधान ‘ख्वाजा अब्दुस्समद' को नियुक्त किया, 'मुहर ' नामक एक सोने का सिक्का (आइने अकबरी के अनुसार एक मुहर नौ रुपये का होता था), 101 तोले का सबसे बड़ा सोने का सिक्का शंसब, 10 रुपये मूल्य के बराबर गोलाकार सिक्का ‘इलाही' चलाया ।

• अकबर ने चाँदी का एक चौकोर या वर्गाकार सिक्का जलाली ' चलाया , ताँबे का एक सिक्का 'दाम' चलाया, जो रुपये के 40वें भाग के बराबर होता था । उसने कुछ सिक्कों पर ' राम और सीता ' की मूर्ति अंकित करवायी और देवनागरी में 'राम - सिया' लिखवाया।

• असीरगढ़ दुर्ग की विजय स्मृति में एक सोने का सिक्का जिस पर एक ओर ' ताज ' और दूसरी ओर टकसाल का नाम तथा ढालने की तिथि अंकित करवायी।

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