प्रकाश तंतु के उपयोग एवं प्रकीर्णन (Scattering)

प्रकाश तंतु के उपयोग

      अंकीय (Digital) संकेतों के वहन में।

      अन्तरदर्शी (Endscope) में।

      छोटे से चीरे की सहायता से शल्य-क्रिया में।

प्रकीर्णन (Scattering)

      जब माध्यम में धूल तथा अन्य पदार्थों के सूक्ष्म कण होते हैं तो उस माध्यम से गुजरने पर प्रकाश विभिन्न दिशाओं में प्रसरित हो जाता है। इसे प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं।

      लार्ड रैले के अनुसार, प्रकाश के विभिन्न रंगों का प्रकीर्णन उनके तरंगदैध्र्य का व्युत्क्रमानुपाती होता है।

      सूर्य के प्रकाश में बैंगनी रंग का तरंगदैध्र्य सबसे कम तथा प्रकीर्णन सबसे अधिक होता है। लाल रंग का तरंगदैध्र्य सबसे अधिक तथा प्रकीर्णन सबसे कम होता है।

      प्रकीर्णन के अभाव में ही अंतरिक्ष तथा चन्द्रमा से आकाश काला दिखाई देता है।

      प्रकीर्णन के कारण घटने वाली कुछ घटनाएं-

      आकाश का नीला दिखाई देना।

      सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय आकाश का लाल दिखाई देना।

      हरित गृह का गर्म होना, इत्यादि।

प्रकाश का वर्ण विक्षेपण

      सूर्य का प्रकाश जब प्रिज्म से होकर गुजरता है तो अपवर्तन के पश्चात् विभिन्न रंगों के प्रकाश में बँट जाता है। इस प्रकार प्राप्त रंगों के समूह को वर्ण क्रम तथा इस क्रिया को वर्ण विक्षेपण कहते हैं।

      बैंगनी रंग का विक्षेपण सबसे अधिक व लाल रंग विक्षेपण सबसे कम होता है।

      आधार से ऊपर की ओर रंगों का क्रम इस प्रकार होता है- बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल ¼Violet, Indigo, Blue, Green, Yellow, Orange, Red½

      इन्द्रधनुष में परावर्तन, पूर्ण आतंरिक परावर्तन व अपवर्तन, तीनों का उदाहरण मिलता है। इन्द्रधनुष का निर्माण वायुमंडल में उपस्थित वर्षा की छोटी बूंदों पर प्रकाश के पड़ने से होता है। इन्द्रधनुष के दो प्रकार होते है- प्राथमिक व द्वितीयक।
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