ऊष्मीय प्रसार (Thermal Expansion)
सामान्यतः पदार्थो को ऊष्मा देने पर उनकी विमाओं (dimensions) लम्बाई, क्षेत्रफल तथा आयतन में वृद्धि होती है। इस वृद्धि को ऊष्मीय प्रसार कहते हैं। ताप बढ़ने पर पदार्थ के अणुओं के बीच की दूरी बढ़ जाती है।
कुछ पदार्थ जैसे जल, सिल्वर आयोडाइड, इत्यादि का एक विशिष्ट ताप परिसर में ताप बढ़ने पर उनमें संकुचन होता है।
जल का यह असामान्य व्यवहार 00C से 40C के बीच तथा सिल्वर आयोडाइट (Agl) का 800C से 1400C के बीच होता है।
अवांछित ऊष्मीय प्रसार के बचाव के उपाय :
दो रेल पटरियों के खण्डों के बीच थोड़ी- थोड़ी दूरी पर खाली जगह छोड़ दिया जाता है (ताप परिवर्तन से रेल पटरियों के स्वरूप में किसी प्रकार के परिवर्तन को रोकने के लिए)
लम्बी दूरी वाली द्रव वाहक पाइपों के बीच- बीच में लूप लगाया जाता है।
पेंडुलम घड़ियों में लम्बाई परिवर्तन को रोकने के लिए साधारण धातुओं की जगह इनवार (लोहा+निकिल) नामक मिश्र धातु का प्रयोग किया जाता है।
मग एवं ग्लास बनाने में साधारण काँच के स्थान पर पाइरेक्स काँच का प्रयोग किया जाता है (साधारण काँच की तुलना में पाइरेक्स काँच का ऊष्मीय प्रसार कम होता है)।