कुछ पदार्थों की विशिष्ट ऊष्मायें निम्नलिखित है-
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पदार्थ
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विशिष्ट ऊष्मा
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पदार्थ
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विशिष्ट ऊष्मा
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सीसा
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0.03
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तारपीन
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0.42
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लोहा
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0.11
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बर्फ
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0.50
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बालू
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0.20
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एल्कोहाॅल
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0.60
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एल्यूमिनियम
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0.21
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जल
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1
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गैसों की दो विशिष्ट ऊष्माएं होती हैं।
गुप्त ऊष्मा
निश्चित तापमान पर किसी पदार्थ के इकाई द्रव्यमान के अवस्था परिवर्तन के लिए जितनी ऊष्मा की आवश्यकता होती है, उसे गुप्त ऊष्मा कहते हैं।
इसका एस0आई0 मात्रक जूल/किलोग्राम होता है।
नियत ताप पर ठोस के एकांक द्रव्यमान को द्रव में बदलने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को गलन की गुप्त ऊष्मा कहते हैं। बर्फ के गलन की गुप्त ऊष्मा का मान 80 कैलोरी /ग्राम होता है।
नियत ताप पर द्रव के एकांक द्रव्यमान को गैस में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को वाष्पन की गुप्त ऊष्मा कहते हैं। जल के वाष्पन की गुप्त ऊष्मा का मान 536 कैलोरी/ग्राम होता है।
भार में गुप्त ऊष्मा होने के कारण यह समान ताप पर गरम जल से अधिक जलन पैदा करती है।
गलनांक
वह निश्चित ताप, जिस पर कोई ठोस, द्रव में परिवर्तित होता है, उसका गलनांक बिन्दु कहा जाता है।
गलनांक पर दाब का प्रभाव
पिघलने पर संकुचित होने वाले पदार्थ (बर्फ, ढलवा लोहा, विस्मथ): दाब बढ़ने पर गलनांक कम होता है।
पिघलने पर प्रसारित होने वाले पदार्थ: दाब घटने से गलनांक बढ़ता है।
अशुद्धि का प्रभाव: सामान्यतः अशुद्धि मिलाने से गलनांक कम हो जाता है।
00C पर पिघलती द्रव में अल्प की मात्रा में नमक या शोरा मिला देने पर उसका गलनांक लगभग 220C तक पहुँच जाता है।