सेव द चिल्ड्रेन रिपोर्ट के विषय में संक्षिप्त परिचय

हाल ही में गैर सरकारी संगठन ' सेव द चिल्डेन इंटरनेशनल ' द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया कि युद्ध और उसके प्रभाव की वजह से हर साल कम से कम एक लाख बच्चों की मौत हो जाती है ।इसमें भूख और मदद ना मिलने जैसे प्रभाव भी शामिल हैं ।रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुमानत : 10 युद्धग्रस्त देशों में 2013 से 2017 के बीच युद्ध की वजह से 5 .5 लाख बच्चे दम तोड़ चुके हैं ।इस रिपोर्ट के अनुसार हर पाँच में से करीब एक बच्चा संकटग्रस्त इलाकों में रह रहा है और बीते दो दशक में यह सबसे बड़ी संख्या है ।'

   रिपोर्ट के मुख्य बिंदु ।
   
 सेव द चिल्ड्रेन ने कहा कि उसने ओस्लो ( नॉर्वे ) स्थित पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ अध्ययन में पाया कि 2017 में 42 करोड़ बच्चे संकटग्रस्त इलाकों में रह रहे थे ।
 
यह दुनियाभर के बच्चों की संख्या का 18 फीसदी हिस्सा है और बीते साल के मुकाबले इसमें 3 करोड़ बच्चों का इजाफा हुआ है ।

इन संकटग्रस्त इलाकों में अफगानिस्तान , मध्य अफ्रीकी गणराज्य , कांगो , इराक , माली , नाइजीरिया , सोमालिया , दक्षिण सूडान , सीरिया और यमन जैसे देश शामिल हैं ।

रिपोर्ट के अनुसार इन बच्चों की मौत युद्ध और उसके प्रभावों से हुई है , जिसमें भूख , अस्पतालों और बुनियादी ढाँचों को हुआ नुकसान , स्वास्थ्य देखभाल तक पहुँच की कमी , स्वच्छता और मदद नहीं मिल पाने जैसे कारण भी शामिल हैं ।

 रिपोर्ट के अनुसार युद्ध में घायल हुए और मारे गए बच्चों की संख्या तीन गुना बढ़ी है ।  

 सेव द चिल्ड्रेन 

 सेव द चिल्ड्रेन विश्व के सबसे पुराने बाल अधिकार संगठनों में से एक है  । इसकी स्थापना वर्ष 1919 में हुई थी ।यह भारत में वर्ष 2008 से कार्यरत है ।भारत के 18 राज्यों में यह अब तक 6 .1 मिलियन बच्चों तक अपनी पहुँच बना चुका है ।यह एनजीओ बच्चों को आपात स्थिति के दौरान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा , शोषण से सुरक्षा और जीवन रक्षक सहायता प्रदान करने के लिए भारत और शहरी क्षेत्रों के दूरस्थ क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रम चलाता है। यह बच्चों के सर्वोत्तम हित के लिए नीतियों में बदलाव लाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करता है ।विश्व स्तर पर सेव द चिल्ड्रेन 120 देशों में मौजूद है और वहाँ रहने वाले बच्चों की स्थिति को सुधारने के लिए काम करता है ।

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