मुगल बादशाह बाबर ने अपना आत्मकथा तुजुक - ए - बाबरी को तुर्की भाषा में लिखा था । बाबर द्वारा 1508 - 1519 ई, 1520 - 1525 ई और 1529-1530 ई . के मध्य की घटनाओं का वर्णन न करने के बावजूद यह एक अमूल्य ग्रंन्थ है। मुगल काल में इसका अनुवाद चार बार पर्शियन ( फारसी ) भाषा में हुआ । हुमायूं के शासनकाल में जैन खाँ और पायन्दा हसन ने, अकबर के समय में अब्दुर्रहीम खान खाना ने और शाहजहाँ के समय में मीर अबु तालिब तुरबाती ने इसका अनुवाद किया। बाद में कई बार उसका अनुवाद फारसी भाषा में और तत्पश्चात् विभिन्न यूरोपियन भाषाओं में , मुख्यत अंग्रेजी और फ्रांसीसी भाषाओं में , भी उसका अनुवाद हुआ। इनमें मैडम बैवरिज द्वारा अंग्रेजी में किये गये अनुवाद को श्रेष्ठ माना गया है क्योंकि यह तुर्की भाषा से अंग्रेजी में किया गया अनुवाद है। मूलतया यह बादशाह बाबर की आत्मकथा है यद्यपि कहीं - कहीं इसमें हुमायूँ के बारे में भी लिखा गया है। कुछ समय ऐसे भी हैं जिसमें बाबर इसे नहीं लिख पाया था। परन्तु तब भी बाबर के जीवन के बारे में जानने का यह सबसे उपयोगी ग्रन्थ है। सभी आधुनिक इतिहासकारों ने इस ग्रन्थ की प्रशंसा की है और इसे ऐतिहासिक - स्रोत की दृष्टि से श्रेष्ठ माना है। इसके अतिरिक्त इसकी भाषा इतनी श्रेष्ठ है कि इसे साहित्यिक - ग्रन्थ की दृष्टि से भी उच्च स्थान प्रदान किया गया है।