सामान्य विज्ञान - 01 : विज्ञान एवं उसकी शाखाएं

Day - 01

          आज हम शुरु करेंगे सामान्य विज्ञान का अध्ययन जिसमें भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण व प्रदूषण तथा पर्यावरणीय पारिस्थितिकी के सामान्य मुद्दे होंगे।

           क्रमबध्द तरीके से नोटस् की तैयारी में भौतिक विज्ञान से शुरुवात करेंगे.. और क्रमशः सभी विषयों पर चर्चा करते हुए नोटस् तैयार करेंगे।

विज्ञान की परिभाषा

          वास्तविक अनुभव या प्रेक्षणों पर आधारित तथ्यों के तार्किक विश्लेषण के फलस्वरुप अर्जित क्रमबध्द व सुव्यवस्थित ज्ञान को विज्ञान कहते हैं, जिसे पुनः प्रयोगों द्वारा सत्यापित किया जा सकता है।

           विज्ञान का स्वरूप (Form of Science) : 'विज्ञान' शब्द का सन्धि-विच्छेद है - वि + ज्ञान, अर्थात 'विशेष ज्ञान'। अतः व्यापक रूप में (In General) 'किसी भी विषय के सुव्यवस्थित ज्ञान' को विज्ञान कहते है।

            विज्ञान की विषय-वस्तु (Subject-matter of Science) -  विज्ञान में "प्रकृति' का अध्ययन किय जाता है और प्रकृति क्या है? विश्व में जो कुछ भी द्रव्य व ऊर्जा (Mattaer and Energy) से निर्मित है वह सब प्रकृति का ही भाग है, यहां तक कि अन्तरिक्ष एवं काल भी प्रकृति के ही अंग है। अतः किसी भी विषय का वास्तविक ज्ञान विज्ञान है।

वैज्ञानिक विधि (Scientific Method) - अब प्रश्न उठता है कि वास्तविक ज्ञान कैसे प्राप्त किया जाए? इसके लिए वैज्ञानिक विधि अपनायी जाती है, जिसके कई चरण होते है -

  1. प्रेक्षण (Observation)
  2. समस्या की पहचान (Defining the Problem)
  3. परिकल्पना का निर्माण (Framing of Hypothesis)
  4. प्रायोगिक परीक्षण (Testing the Hypothesis)
  5. सिध्दान्त का निर्माण (Theorising)

            विज्ञान का उद्देश्य - विज्ञान का उद्देश्य प्राकृतिक घटनाओं में अन्तर्निहित नियमों की खोज करना। वास्तव में यह शुध्द विज्ञान का कार्य है। अनुप्रयुक्त विज्ञान या प्रौद्योगिकी (Applied Science or Technology) का कार्य है - शुध्द विज्ञान द्वारा खोजे गए प्रकृति के नियमों का मानव के कल्याण के लिए अनुप्रयोग करना। उदाहरण के लिए, ऊष्मागतिकी के नियमों की खोज शुध्द विज्ञान में हुई और उनका अनुप्रयोग करके अन्तर्दहन इंजनों का निर्माण प्रौद्योगिकी ने किया।

           विज्ञान और कला में अन्तर - इनमें मूलभूत अन्तर यह है कि कला का आधार व्यक्तिगत अनुभव व अन्तश्चेतना (Intuition) होती है जिससे कला में व्यक्तिपरकता आ जाती है जबकि विज्ञान का आधार प्रेक्षण व तर्क होता है तथा विज्ञान के नियमों का सत्यापन कोई भी व्यक्ति प्रयोग द्वारा कर सकता है जिससे उसमें वस्तुपरकता होती है।

          परिकल्पना और सिध्दान्त (Hypothesis and Theory - ज्ञात प्रायोगिक तथ्यों के आधार पर किसी विषय की व्याख्या करने के लिए जो 'कामचलाऊ मॉडल' बनाया जाता है उसे परिकल्पना कहते हैं। अनेक नियंत्रक प्रयोगों द्वारा परिकल्पना में सुधार किए जाते हैं जब तक कि वह सम्पूर्ण ज्ञात तथ्यों की वैज्ञानिक व्याख्या न करने लगे। अब वह सिध्दान्त बन जाती है।

           सिध्दान्त व नियम ( Theory and Law) - सिध्दान्त एक सीमित विषय के सभी ज्ञात तथ्यों की व्याख्या करता है, परन्तु यदि किसी तत्सम्बन्धित नए प्रायोगिक तथ्य का पता चलता है जिसे वह सिध्दान्त स्पष्ट नहीं कर पाता है तो वह सिध्दान्त अमान्य कर दिया जाता है, अर्थात् आवश्यक नहीं कि सिध्दान्त सदैव ही सत्य बना रहे। दूसरी ओर विज्ञान में वे ही सिध्दान्त नियम बन पाते हैं जो सभी परिस्थितियों में सदैव सत्य बने रहते है अर्थात नियम अधिक व्यापक व शास्वत होते हैं, जैसे - ऊर्जा-संरक्षण, संवेग-संरक्षण, गुरुत्वाकर्षण आदि नियम है, जबकि प्रकाश का तरंग-सिध्दान्त केवल एक सिध्दान्त है।

अगले नोटस् में हम विज्ञान की प्रमुख शाखाएं पढ़ेंगे..

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