मुगल बादशाह बाबर की आत्मकथा तुजुक - ए - बाबरी या बाबरनामा भाग 2

बाबर ने अपने जीवन की घटनाओं के अतिरिक्त विभिन्न स्थानों की जलवायु , प्रकृति , पशु , पक्षी , राजनीतिक स्थिति , विभिन्न व्यक्तियों और शासकों के चरित्र और व्यक्तित्व , युद्ध शैली , जन - जीवन , आदि सभी के बारे में लिखा। उसने इसमें भारत का विवरण भी दिया है। ऐसा हुआ है कि बाबर ने परिस्थितियों को समझने में भूल की हो और उसके कुछ निर्णय गलत भी हो गये हो जैसा कि उसके भारत - विवरण से प्रतीत होता है। परन्तु बाबर ने जहाँ तक भी सम्भव हुआ, स्पष्ट लिखा और सत्य लिखा। अपनी दुर्बलताओं, नशा करने का आदता, दावतों, दोषों आदि को भी छुपाने का प्रयत्न उसने नहीं किया । उसने अपना विवरण अपने सिंहासन पर बैठने के समय से आरम्भ किया और बीच - बीच में कुछ समय को छोडकर प्रायः 1529 ई . के समय के अन्त तक लिखा। भारत के सम्बन्ध में उसने यहाँ की जलवायु , राजनीतिक स्थिति, जन - जीवन, दौलतखाँ लोदी, इब्राहीम लोदी, आलमखाँ लोदी, राणा संग्राम सिंह आदि के व्यक्तित्व और चरित्र और उनसे हुए युद्धों के बारे में लिखा। उसने गुजरात , मालवा , बंगाल और बहमनी के मुस्लिम राज्यों तथा विजयनगर के हिन्दू - राज्य के बारे में भी लिखा।

 उसका विवरण बहुत ही आकर्षक, स्पष्ट और सत्य के निकट माना गया है जिसके कारण एलफिन्सटन ने तजक - ए - बाबरी को एशिया में वर्णित ग्रन्थों में से उसे एकमात्र वास्तविक मेनिटाणिक ग्रन्थ स्वीकार किया है।

Posted on by