तापदीप्त बल्ब (Incandescent Bulb), प्रतिदीप्त नली,

तापदीप्त बल्ब (Incandescent Bulb)  

      सामान्य प्रकार के विद्युत बल्बों को तापदीप्त बल्ब कहते हैं।

      इसका तापमान 15000C से 27000C तक होता है।

      बल्ब के अंदर नाइट्रोजन तथा आर्गन जैसी अक्रिय गैस भरी जती हैं, जिससे बल्ब के तंतु का वाष्पन रोका जा सके।

      तंतु के रूप में टंगस्टन का प्रयोग किया जाता है, जिसका गलनांक 33800C होता है।

      90% ऊष्मा तथा 10% प्रकाश प्राप्त होता है।

प्रतिदीप्त नली

      काँच की एक बेलनाकार खोखली नली होती है, जिसमें दोनों छोरों पर इलेक्ट्रोड होते हैं।

      इलेक्ट्रोडों पर बेरियम आॅक्साइड की लेप चढ़ाई जाती है, ताकि विद्युत धारा के प्रवाह से इलेक्ट्रोडों से अधिक इलेक्ट्राॅनों का उत्सर्जन हो सके।

      नली के अन्दर निम्न दाब पर गैस भरी जाती है, जिसके परमाणू इलेक्ट्राॅनों द्वारा उत्ेजित होकर पराबैंगनी किरणें (Ultraviolet rays) छोड़ते हैं। 

      नली की दीवारों पर फाॅस्फोरस नामक प्रतिदीप्त पदार्थ का लेप चढ़ा रहता है, जो पराबैंगनी किरणों का अवशोषण कर दृश्य प्रकाश छोड़ते है।

      नली में श्वेत प्रकाश प्राप्त करने के लिए पारा तथा आॅर्गन, पीला प्रकाश के लिए सोडियम तथा नारंगी प्रकाश के लिए निआॅन का उपयोग किया जाता है।

      निआॅन का उपयोग विज्ञापन के ट्यूबों में भी होता है।

      इस नली में उत्पन्न ऊर्जा का 70% ऊष्मा के रूप में तथा 30% प्रकाश के रूप में प्राप्त होता है।

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