दैनिक जीवन में भौतिकी

दैनिक जीवन में भौतिकी

ठोसों में ऊष्मीय प्रसार के कुछ व्यवहारिक उपयोग-

      गैस, कच्चा तेल तथा जल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए लोहे से निर्मित पाइप लाइन का प्रयोग किया जाता है। ये पाइप लाइन ऊष्मीय प्रसार के कारण लम्बाई में बढ़ना चाहेंगे किन्तु जहाँ-तहाँ जकड़े रहने पर उनके प्रसार से उन पर बल लगेंगे, जो उन्हें तोड़ डालेंगे। इस प्रकार की क्षति से बचने के लिए इन पाइपों में जगह-जगह पर लूप बना दिये जाते हैं।

      रेल की पटरियाँ लौह धातु (Iron-metal) से निर्मित होती हैं, अतः रेल की दो पटरियों के जोड़ पर थोड़ा सा स्थान रिक्त छोड़ दिया जाता है जिससे गर्मी के दिनों में ताप बढ़ने से रेल पटरियों की लम्बाई बढ़ने के लिए खाली स्थान मिल सके, अन्यथा रेल की पटरियाँ तिरछी हो जायेंगी तथा रेल दुर्घटना हो सकती है।

      किसी लोलक घड़ी का आवर्तकाल (Time Period) उसमें लटके किसी लोलक की लम्बाई पर निर्भर करता है, लम्बाई बढ़ने से आवर्तकाल बढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरूप घड़ी सुस्त हो जाती है तथा जाड़े के मौसम में लोलक की लम्बाई घटने के कारण आवर्तकाल कम हो जाता है जिसके परिणामस्वरूप घड़ी तेज हो जाती हैं इससे बचने के लिए घड़ी का लोलक इस प्रकार बनाया जाता है कि उस पर ताप परिवर्तन का प्रभाव नगण्य हो।

      काँच के गिलास में गर्म जल डालने पर, काँच चटक जाता है, क्योंकि काँच ऊष्मा का कुचालक है। गर्म जल डालते ही अन्दर का भाग गर्म हो जाता है और फैलता है परन्तु काँच के गिलास का बाहरी भाग ठण्डा ही रहता है अतः गिलास चटक जाता है।

      काँच के बोतल में डाॅट फंसने पर बोतल की गर्दन को गर्म जल में रखकर गर्म किया जाता है, जिससे बोतल की गर्दन का व्यास बढ़ जाये और डाॅट बोतल से बाहर निकल सके। यदि काँच की बोतल पर धातु का ढक्कन लगा है तो गर्म करने पर (काँच की अपेक्षा धातु का प्रसार गुणांक अधिक होने के कारण) उसमें प्रसार होता है और वह ढीली हो जाती है।
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