हाल ही में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया । इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम है । साइंस फॉर द पीपल , एंड पीपल फॉर द साइंस । इस अवसर पर वर्ष 2016 , 2017 और 2018 के लिये शांति स्वरूप भट्नागर पुरस्कार भी प्रदान किये गए ।
प्रोफेसर सी वी रमन ( चंद्रशेखर वेंकटरमन )
हमारे देश के उत्कृष्ट वैज्ञानिको में से एक प्रोफेसर सी वी रमन ( चंद्रशेखर वेंकटरमन ) ने 28 फरवरी 1928 को भौतिकी विषय में । एक उत्कृष्ट खोज की थी , जो की रमन प्रभाव ( Raman Effect ) के रूप में प्रसिद्ध है । पारदर्शी पदार्थ से गुजरने पर प्रकाश की किरणों में आने । वाले बदलाव पर की गई इस महत्वपूर्ण खोज के लिए 1930 में उन्हें भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया । वह यह पुरस्कार ग्रहण करने वाले भारत ही नहीं बल्कि एशिया के पहले वैज्ञानिक थे । रमन प्रभाव स्पेक्ट्रोस्कोपी में प्रख्यात भौतिकविद् द्वारा खोजी गई एक घटना है , जो इंडियन एसोसिएशन ऑफ द कल्टिवेशन ऑफ साइंस , कोलकाता की प्रयोगशाला में काम करते हुए किया गया था । प्रकाश की तरंगदैर्ध्य में तब परिवर्तन होता है जब प्रकाश किरण अणुओं द्वारा । विक्षेपित हो जाती है ।
क्या है रमन प्रभाव ?
रमन प्रभाव के अनुसार जब प्रकाश किसी पारदर्शी । माध्यम ( ठोस , द्रव या गैस ) से गुजरता है तो उस दौरान प्रकाश की तरंगदैर्ध्य में बदलाव दिखाई देता है , अर्थात जब प्रकाश तरंग एक द्रव्य से निकलती है तो इस प्रकाश तरंग का कुछ भाग एक ऐसी दिशा में फैल जाता है जो कि आने वाले प्रकाश तरंग की दिशा से भिन्न होता है । इसे रमन प्रभाव कहा जाता है ।
इस खोज के सम्मान में 1986 से इस दिन को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाने का चलन है । 1954 में भारत सरकार ने सी . वी . रमन को सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा । रमन प्रभाव का उपयोग आज पूरी दुनिया में हो रहा है ।
शांति स्वरूप भट्नागर पुरस्कार
हर साल 45 वर्ष से कम आयु के कई वैज्ञानिकों को देश भर के विभिन्न संस्थानों से चुना जाता है । और पिछले पाँच वर्षों में उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक कार्य के लिये इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है ।