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संविधान का पालन करें और उसके आदशों , संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे।
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स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदशों को हृदय में सँजोए रखें और उनका पालन करें।
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भारत की संप्रभुता एकता और अखण्डता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखें।
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देश की रक्षा करें और आह्वान किए जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।
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भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे, जो धर्म भाषा और प्रदेश या वर्ग आधारित सभी भेदभावों से परे हो। ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हैं।
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हमारी मिश्रित संस्कृति ( Composite Culture ) की गौरवशाली परपरा का महत्व समझे और उसका परिरक्षण करें।
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प्राकृतिक पर्यावरण, जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव सम्मिलित हैं, की रक्षा करें और उसका संवर्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दयाभाव रखें।
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद, ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।
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सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहे।
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व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत् प्रयास करें, जिससे राष्ट्र निरंतर बहुत हुए प्रयत्न पर उपलब्धि की नयी ऊँचाइयों को प्राप्त करे।
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6 वर्ष की आयु से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के माता - पिता और संरक्षक जो भी हों, उन्हें शिक्षा के अवसर प्रदान करें । (इस कर्त्तव्य को संविधान के 86वें संशोधन अधिनियम , 2007 की धारा 4 द्वारा जोड़ा गया।)