क्रमशः..
Day - 22
- कैबिनेट मिशन ने भारत आकर सभी नेताओं से विचार-विमर्श किया, किन्तु उसने केवल तीन राजनीतिक दलों को मान्यता दी – मुस्लिम लीग, कांग्रेस और राजाओं का संघ्। लीग के उस समय अध्यक्ष थे – मोहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस के मौलाना आजाद तथा राजाओं के भोपाल के नवाब। ये तीनों मुसलमान थे।
- कैबिनेट मिशन की योजना को कांग्रेस द्वारा स्वीकार कर लिया गया लेकिन मुस्लिम लीग द्वारा इस योजना का विरोध किया गया क्योंकि इस योजना में मुस्लिम लीग के पाकिस्तान के निर्माण अर्थात भारत – विभाजन को मान्यता नहेऐं दी गयी थी।
- कैबिनेट मिशन प्रस्ताव के आधार पर जुलाई 1946 में ‘संविधान सभा’ के चुनाव कराये गये। संविधान सभा के कुल सदस्यों की संख्या 389 निश्चित की गयी, जिसमें 296 ब्रिटिश प्रान्तों के प्रतिनिधि, 93 देशी रियासतों के प्रतिनिधि तथा 4 कमिश्नर क्षेत्रों के प्रतिनिधि थे। ब्रिटिश प्रान्तो के 296 प्रतिनिधियों का साम्प्रदायिक आधार इस प्रकार विभाजन किया गया था – 213 सामन्य, 79 मुसलमान तथा 4 सिख।
- चुनाव परिणामों के पश्चात् 2 सितम्बर, 1946 को पण्डित जवाहर लाल नेहरू की अध्यक्षता में ‘अन्तरिम सरकार’ का गठन किया गया। इस सरकार में मुस्लिम लीग के नेता शामिल नहीं हुए। बाद में 26 अक्टूबर, 1946 को मुस्लिम लीग के 5 सदस्यों को शामिल करते हुए अन्तरिम सरकार का पुनर्गठन किया गया।
अन्तरिम मंत्रिमण्डल
- लार्ड माउण्टबेटन- अध्यक्ष
- जवाहर लाल नेहरु- कार्यकारी परिशद में उपाध्यक्ष, विदेशी मामले तथा राश्ट्रमण्डल
- बल्लभ भाई पटेल- गृह, सूचन प्रसारण
- जान मथाई- उद्योग तथा आपूर्ति
- बलदेव सिंह- रक्षा
- सी. राजगोपालाचारी- शिक्षा
- सी.एच. भाभा- कार्य, खान तथा बन्दरगाह
- राजेन्द्र प्रसाद- खाद्य एवं कृशि मंत्री
- आसफ अली- रेलवे
- जगजीवन राम- श्रम
- लियाकत अली खाँ- वित्त
- आई.आई. चुन्दरीगर- वाणिज्य
- अब्दुल रब नश्तर- संचार
- जोगेन्द्र नाथ मण्डल- विविध
- गजानफर अली खां- स्वास्थ्य
- संविधान सभा के लिए सम्पन्न हे चुनाव में मुस्लिम लीग को मात्र 73 सीटें प्राप्त हुई जबकि कांग्रेस को 208 सीटें मिलीं। मुस्लिम लीग ने अपनी स्थिति को कमजोर देखते हुए संविधान सभा का बहिष्कार करने का निश्चय किया तथा पाकिस्तान के लिए पृथक संविधान सभा के गठन की मांग की।
जारी..
मिलते है हम अगले दिन, संविधान का निर्माण की प्राक्रिया विषय पर चर्चा करने के लिये..