डीएनए टेक्नोलॉजी विधेयक ( DNA Technology Bill)

8 जनवरी , 2019 को डीएनए टेक्नोलॉजी (यूज एंड एप्लीकेशन) रेगुलेशन बिल, 2018 लोकसभा द्वारा पारित कर दिया गया था। यह विधेयक अपराधियों, पीड़ितों, संदिग्धों और विचाराधीन कैदियों समेत चुनिंदा वर्ग के लोगों की पहचान स्थापित करने के लिए डीएनए (डीऑक्सीरिबो न्यूक्लिक एसिड) के इस्तेमाल और अनुप्रयोग का नियमन करेगा।

विधेयक में प्रावधान :

• विधेयक में नेशनल डीएनए डाटा बैंक और रीजनल डीएनए डाटा बैंक की स्थापना का प्रावधान है। प्रत्येक डाटा बैंक अपराध स्थलों, संदिग्धों या विचाराधीन अपराधियों की सूची समेत सभी तरह की सूचियां रखी जायेगी।
• आपराधिक जांच और लापता लोगों की पहचान में डीएनए प्रोफाइलिंग के इस्तेमाल के लिए विधेयक में संबंधित व्यक्ति अनुमति लेने का भी प्रावधान किया गया है। जबकि फौजदारी मामलों में डीएनए प्रोफाइलिंग के इस्तेमाल के लिए अनुमति लेने का प्रावधान नहीं किया गया है।

विधेयक का उद्देश्य :

इस विधेयक का उद्देश्य डीएनए प्रयोगशालाओं की मान्यता का मानकीकरण करना है । प्रयोगशालाएं बनाना है और डीएनए डाटाबैंक स्थापित करना है । इससे देश में लावारिस शवों, लापता बच्चों की पहचान भी डीएनए प्रोफाइलिंग कारगर होगी। साथ ही क्रूर अपराधियों को पकड़ने में यह तकनीक काम आयेगी ।
 • विधेयक के लाभ : केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिक मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि इस विधेयक के तहत एक डीएनए नियामक बोर्ड बनाया जायेगा जो उक्त विषय पर केन्द्र और राज्यों को सुझाव देगा।
 • गृह , विदेश , रक्षा और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय समेत छह मंत्रालयों को इस विधेयक के पारित हो जाने से लाभ होगा। सीबीआई, एनआईए जैसी जांच एजेंसियां और आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को भी यह सीधा लाभ पहुंचाएगा।

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