पडोसी पहले नीति (Neighbourhood First Policy)
8 मई , 2003 को पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेई ने कहा था ‘आप दोस्त बदल सकते हैं पर पड़ोसी नहीं' (You can change friends , but not neighbours)। इस छोटे से वाक्य ही भूतपूर्व प्रधानमंत्री ने पड़ोसी देशों के महत्त्व को रेखांकित किया था। 2014 में पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई एनडीए सरकार ने इसी वाक्य को सूत्रवाक्य मानकर पड़ोसी पहले नीति (Neighbourhood first policy) की घोषणा की थी। अगस्त 2014 में नेपाल दौरे पर गये भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पड़ोसी पहले नीति का जिक्र किया। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अगस्त 2014 में सिंगापुर यात्रा के दौरान इस नीति का उल्लेख किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने चौथे बिम्सटेक सम्मेलन के दौरान इस नीति का उल्लेख किया। इस नीति के तहत भारत के दृष्टिकोण को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से व्यक्त किया जा सकता है
• भारत अपने पड़ोसी देशों भूटान, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश जैसे देशों तथा हिन्द महासागरीय क्षेत्र में अवस्थित मालदीव तथा श्रीलंका जैसे देशों को राजनैतिक तथा कूटनीतिक वरीयता देगा।
• भारत अपने पड़ोसी देशों की किसी आपातकालीन आवश्यकता को पूरी करने के प्रति प्रतिबद्ध है।
• भारतीय उपमहाद्वीप में सांस्कृतिक, राजनैतिक तथा आर्थिक सहयोग को बढ़ावा दिया जाना।
• भारत के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर एक अनौपचारिक क्षेत्रीय सप्रमु क्षेत्र (Informal Sovereign Region) की स्थापना करना इस नीति के उद्देश्यों में शामिल है।