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वर्तमान समय में माल्थस का सिद्धान्त शायद ही कहीं लागू होता हो । बदलती तकनीकी एवं सामाजिक संरचना पर उन्होंने बिल्कुल ध्यान नहीं दिया । जनसंख्या निरोधक कृत्रिम नियंत्रणों की अपेक्षा प्राकृतिक नियंत्रणों पर अधिक बल दिया । फिर भी जनसंख्या को नियंत्रित करने की दिशा में उनका सिद्धान्त एक मार्ग - दर्शक की भूमिका अवश्य निभाता है ? माल्थस पहला व्यक्ति था जिसने जनसंख्या वृद्धि पर वैज्ञानिक रूप से अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया । भारत में 1921 ई० के पहले काफी हद तक माल्थस के सिद्धांत लागू होते थे क्योंकि 1911 - 21 के दशक में जनसंख्या में वास्तविक गिरावट देखी गई । परंतु हरित क्रांति के पश्चात् खाद्यान्न उत्पादन में तीव्र वृद्धि से यह सिद्धान्त भारतीय संदर्भ में भी प्रासंगिक नहीं रहा ।
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