एक्ट ईस्ट पॉलिसी ( Act East Policy ) ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी के सूत्रपात का श्रेय मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को जाता है। यह नीति उस 'लुक ईस्ट पॉलिसी' का अद्यतन और विकसित स्वरूप है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंहा राव के कार्यकाल में हुई थी। मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने लुक ईस्ट पॉलिसी को धार देकर उसे ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी' के रूप में प्रभावी बनाया है। वर्ष 2014 में केन्द्र में आई एनडीए सरकार ने ' एक्ट ईस्ट पॉलिसी 'का सूत्रपात किया। अगस्त 2014 में भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सिंगापुर में इस नीति का स्पष्ट उल्लेख किया। भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी एशिया - प्रशांत क्षेत्र में मौजूद देशों की सहभागिता को बढ़ाने के लिये लाई गई थी। यह नीति पूर्व की ‘लुक ईस्ट पॉलिसी' का अद्यतन रूप है। भारत ने इस नीति के तहत इंडोनेशिया, वियतनाम, मलेशिया, जापान, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, सिंगापुर, आस्ट्रेलिया तथा आसियान देशों के साथ - साथ एशियाई प्रशांत क्षेत्र में अवस्थित देशों से संपर्क को आगे बढ़ाया है। इस नीति का उद्देश्य भारत - आसियान देशों के बीच अधोसंरचना, विनिर्माण, व्यापार कौशल विकास, शहरी विकास आदि पहलों को आगे बढ़ाना है। इसके अतिरिक्त इस नीति का उद्देश्य आर्थिक, सांस्कृतिक तथा रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाकर इस क्षेत्र में स्थिरता स्थापित करनी है। इसी नीति के अंतर्गत 26 जनवरी, 2018 को गणतंत्र दिवस पर आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्षों को बुलाया गया था। ध्यातव्य है कि बिम्सटेक सम्मेलन - 2018 के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस नीति का जिक्र कर चुके हैं। गौरतलब है कि लुक ईस्ट पॉलिसी को 1991 में तत्कालीन नरसिंहा राव सरकार ने शुरू किया था। इसके बाद वाजपेई सरकार और फिर यूपीए सरकार ने इस नीति को मंद गति से आगे बढ़ाया। इस नीति का मुख्य उद्देश्य दक्षिण - पूर्व एशिया में चीन की स्थिति को संतुलित करना था। इसी नीति को एक नया कलेवर देकर मोदी सरकार ने एक्ट ईस्ट पॉलिसी का सृजन किया तथा इसे गतिशील बनाया है।