औपनिवेशिक काल में भारत का सर्व प्रमुख उद्योग सूती वस्त्र उद्योग था । प्रारंभ में यूरोपीय लोग भारत से मसालों का प्रयोग करते थे लेकिन बाद में 17वीं शताब्दी में सूती वस्त्र ही व्यापार के प्रमुख वस्तु बन गया।
सूती वस्त्र उद्योग प्रथम सूती मिल की स्थापना 1818 में Fort Glaster कोलकाता में की जो असफल रही । प्रथम सफल सूती वस्त्र कारखाना 1854 में मुंबई में (कावस जी डाबर) द्वारा की गई । सूती वस्त्र उद्योग शुद्ध कच्चा माल आधारित कृषि उद्योग है अतः इस उद्योग की स्थापना कच्चे माल के क्षेत्र अथवा बाजार क्षेत्र कहीं भी की जा सकती है। औद्योगिक अवस्थिति सिद्धांत (Alferd Weber ) ने न्यूनतम लागत को आधार बनाया । कृृषि अवस्थी सिद्धांत (Wan Thyunen ) न्यूनतम परिवहन लागत को आधार बनाया। वस्त्र का उत्पादन तीन क्षेत्रों के अंतर्गत होता है- 1-) Mill. 2-) power loom . 3-) Hand loom. इसमें मिल क्षेत्र से उत्पादन घटता जा रहा है व पावर लूम क्षेत्र से बढ़ता जाता है।
सूती वस्त्र उद्योग के लिए अनुकूल दशाएं => - आयी जलवायु - काली मृदा - विद्युत ऊर्जा
=> सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख क्षेत्र ->
Maharashtra => मुम्बई को cotton polish of India कहा जाता है सूती वस्त्र उद्योग की राजधानी है ।
Gujarat => अहमदाबाद को भारत का मेनचेस्टर ( Britain ) पूर्व का बोस्टन (USA) कहा जाता है ।। सूरत जरी के कार्य के लिए प्रसिद्ध है।
Tamil Nadu => कॉटन मिल की सर्वाधिक संख्या कोयंबटूर ( दक्षिण भारत का मैनचेस्टर ) में है । पूरे भारत में एक शहर की दृष्टि से सूती वस्त्र की सर्वाधिक मिलें हैं ।
Uttar pradesh => Kanpur उत्तर भारत का मैनचेस्टर । सूती वस्त्र उद्योग उत्पादन में भारत का स्थान चाइना के बाद दूसरा है ।