सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि खुद को जंगल क निवासी सिद्ध करने में विफल रहे अवैध कब्जेदारों के जंगलों से बेदखल किया जाए ।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से देशभर में करीब 10 लाख लोगों को जंगल खाली करना पड़ सकता है ।
इन निवासियों को ' अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी ( वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम , 2006 के तहत अपने दावे सिद्ध करने थे ।
वन भूमि पर सबसे ज्यादा अतिक्रमण मध्य प्रदेश औ ओडिशा के जंगलों में है , जहां क्रमश : साढ़े तीन लाख औरडेढ़ लाख लोगों के वनाधिकार दावे खारिज हुए हैं ।
क्या है ?
वनों में रहने वाले कई आदिवासी परिवारों की विषम जीवन स्थिति को दूर करने के लिए अनुसूचित जाति एवं अन्य पारंपरिक वन निवासी अधिनियम , 2006 के ऐतिहासिक कानून अमल में लाया गया है ।
इस कानून को , जंगलों में रहने वाले अनुसूचित जातिय एवं अन्य पारंपरिक वन निवासियों को उनका वाजिर अधिकार दिलाने के लिए , जो पीढ़ियों से जंगलों में र रहे हैं लेकिन जिन्हेंवन अधिकारों तथा वन भूमि । आजीविका से वंचित रखा गया है , लागू किया गया है ।
इसकी धारा - 3 ( 1 ) ( एच ) के अंतर्गत अनुसूचित जनजा एवं अन्य पारंपरिक वन क्षेत्निवासियों ( वन अधिका मान्यता ) अधिनियम , 2006 के तहत वन्य गांव , पुरा आबादी वाले क्षेत्रों , बिना सर्वेक्षण वाले गांव तथा व क्षेत्र के अन्य गांव , भले ही वह राजस्व गांव के रूप । अधिसूचित हों या नहीं हों , इनके स्थापन एवं परिवर्तन व अधिकारयहां रहने वाले सभी अनुसूचित जनजातियों ए अन्य पारंपरिक वन निवासियों को प्राप्त है ।
वन अधिकार अधिनियम , 2006 क्या है ?
वन अधिकार अधिनियम ( 2006 ) , वन संबंधी नियमों का |एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है , जो 18 दिसम्बर , 2006 को पास हुआ था ।
यह कानून जंगलों में रह रहे लोगों के भूमि तथा प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार से जुड़ा हुआ है , जिन्हें औपनिवेशिक काल से ही वंचित किया हुआ था ।
इसका उद्देश्य जहां एक ओर वन संरक्षण है , वहीं दूसरी ओर ।यह जंगलों में रहने वाले लोगों को उनके साथ सदियों तक |हुए अन्याय की भरपाई का भी प्रयास करता है ।इस कानून के मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं :
यह जंगलों में निवास करने वाले या वनों पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा करता है ।
• जंगलों में रहने वाले लोगों तथा जनजातियों को , उनके द्वारा उपयोग की जा रही भूमि पर उनको अधिकार प्रदान करता है ।उन्हें पशु चराने तथा जल संसाधनों के प्रयोग का अधिकार देता है ।
• विस्थापन की स्थिति में उनके पुनस्र्थापन का प्रावधान करता जंगल प्रबंधन में स्थानीय भागीदारी सुनिश्चित करता है ।।जंगल में रह रहे लोगों का विस्थापन केवल वन्यजीवन संरक्षण के उद्देश्य के लिए ही किया जा सकता है ।यह भी स्थानीय समुदाय की सहमति पर आधारित होना चाहिए ।
• वन संरक्षण अधिनियम ( 2006 ) स्थानीय लोगों को भूमि पर अधिकार प्रदान कर वन संरक्षण को बढ़ावा देता है ।यह वन भूमि पर गैर - कानूनी कब्जों को रोकता है तथा वन संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों के विस्थापन को अंतिम विकल्प मानता है ।विस्थापन की स्थिति में यह लोगों के पुनस्र्थापन का अधिकार भी प्रदान करता है ।