बैंकों व्यवस्था में प्रयोग होने वाली शब्दावली भाग -2

• नेफ्ट प्रणाली ( NEFT ) : इस प्रणाली के तहत इंटरनेट के जरिए नेशनल इलेक्ट्रानिक फंड ट्रांसफर के द्वारा लिखित चेक के स्थान पर एक लाख रुपये से कम धनराशि को एक बैंक से उसी बैंक अन्य बैंक के खाते में खाताधारक द्वारा स्वयं ही स्थानान्तरित किया जा सकता है। 

• रीयल टाइम ग्रॉस सेटेलमेंट ( RTGS ) : इस प्रणाली के द्वारा एक लाख से अधिक की धनराशि को खाताधारक द्वारा खुद ही इंटरनेट के माध्यम से किसी भी खाता धारक के किसी बैंक खाते में त्वरित रूप से भेजा जा सकता है। 
• चेक ट्रनकेशन प्रणाली ( Chetgue Truncation System CTS ) : नई प्रणाली के तहत किसी व्यक्ति, फर्म या संस्थान द्वारा जारी किए गए किसी चेक के भुगतान हेतु उसे उसकी मूल शाखा या बैंक के पास भौतिक रूप में न भेजकर उसकी स्कैनिंग करके उस चेक को एक गोपनीय पट्टी पर दर्ज सूचनाओं के सत्यापन से ही चेक का भुगतान चेक जमा करने वाली शाखा में प्राप्त किया जा सकता है ।

• साख संकुचन ( Credit Squeeze ) : साख संकुचन विधि के अंतर्गत केंद्रीय बैंक द्वारा कम मात्रा में ऋण वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। ऐसा मुद्रास्फीति को रोकने के लिए किया जाता है, क्योंकि बैंकों द्वारा अधिक ऋण दिए जाने की स्थिति में वस्तुओं की मांग बढ़ने से कीमतें बढ़ने लगती हैं। फलतः मुद्रास्फीति की स्थिति पैदा हो जाती है । 
• खुले बाजार की क्रियाएं ( Open Market Operations ) : इसके अंतर्गत केंद्रीय बैंक द्वारा मुद्रा बाजार में किसी भी प्रकार के बिलों अथवा प्रतिभूतियों क्रय - विक्रय होता है। ऐस केंद्रीय बैंक द्वारा साख नियंत्रण लिए किया जाता है। 
• अनिवासी रुपया खाता [ Non - Resident ( Ex termal Rupee Accounts यह वह खाता होता है , जिसे अनिवासी भारतीयों या भारतीय मूल के विदेशियों द्वारा खोला जा सकता है। ऐस खातेे को भारतीय मुद्रा में खोला जाता इस प्रकार के खाते खाते मूलधन तथा उस पर मिलने वाले ब्याज को को उसके देश वापस कर दिया है । इस प्रकार दिया गया ब्याज कर मुक्त होता है । ऐसा करते हुए रुपये विदेशी मुद्रा में से ही परिवर्तित किया जाता है, जो धन भेजने की लागू होती हैं। 
• अवमूल्यन ( Devaluation : जब अन्य मुद्राओं तुलना में किसी मुद्रा विनिमय मूल्य जानबूझकर कम कर दिया जाता है , तो इसे का अवमूल्यन कहते हैं। 

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