पृथ्वी का स्थल मण्डल एवं जल मण्डल वायु के एक आवरण से घिरा है जिसे वायुमण्डल कहा जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पथ्वी के उत्पत्ति से लेकर अभी तक तीन बार पृथ्वी पर वायुमण्डल अवतरित हुआ। पहले वायुमण्डल में मुख्यतः हाइड्रोजन एवं हिलीयम् उपस्थित थे, जो सौर पवनों एवं पृथ्वी के अत्यधिक ताप के कारण पृथ्वी से लगभग उड़ गये। दूसरा वायुमण्डल उल्का पिण्डों की बारिसों के कारण निर्मित हुआ जब पृथ्वी के अन्दर से ज्वालामुखी क्रियाओं के कारण से गैसें निकली।इस वायुमण्डल में मुख्यतः कार्बनडाईआक्साइड मिथेन तथा जलवाष्प भारी मात्रा में उपस्थित थे। अन्ततः 2.8 वर्ष पूर्व वर्तमान वायुमण्डल का निर्माण हुआ जिसमें ऑक्सीजन एवं ओजोन उपस्थित हुए। पृथ्वी पर वायुमण्डल का कुल द्रव्यमान 5.15x1018 किलोग्राम है । यह पृथ्वी के सतह से लगभग 10000 किमी की ऊचाई तक उपस्थित है। इसका लगभग 99 प्रतिशत द्रव्यमान 32 किमी की ऊचाई तक उपस्थित है। 100 किमी के ऊपर एक काल्पनिक रेखा की अभिकल्पना की गई है जिसे कार्मेन रेखा कहते हैं। इस रेखा के ऊपर वायुमण्डल नगण्य हो जाता है। वायुमण्डल की दो मुख्य गैसे ऑक्सीजन एवं कार्बन डाई ऑक्साइड लगभग 120 किमी तथा 90 किमी की ऊंचाई तक ही पायी जाती हैं । वायुमण्डल में लगभग 78.8 प्रतिशत नाइट्रोजन, 20.95 प्रतिशत ऑक्सीजन, 0.93 प्रतिशत आर्गन , 0.039 प्रतिशत कार्बनडाईआक्साइड , 0.02 प्रतिशत नियान , 0.0005 प्रतिशत हिलियम तथा 0.00005 हाइड्रोजन उपस्थित है। इसके अतिरिक्त ओजोन, मिथेन, क्लोरोफ्लोरो कार्बन, हाइड्रोफ्लोरोकार्बन ,जलवाष्प इत्यादि गैसें भी मौजूद हैं। तापमान परिवर्तन के आधार पर वैज्ञानिकों ने वायुमण्डल को 5 भागों में विभाजित किया है।
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