पृथ्वी पर वायुमंडल भाग 2

पार्ट 2 कंटिन्यू

1.क्षोभमंडल - यह पृथ्वी से 8 - 18 किमी तथा औसत 1 किमी की ऊँचाई तक स्थित है। 165 मीटर ऊपर जाने पर तापमान में 1°C की कमी आ जाती है। वायुमण्डल का 80 प्रतिशत द्रव्यमान इसी मण्डल में उपस्थित है। इस मण्डल में जलवाष्प की मात्रा अत्यधिक होने के कारण बादलों का निर्माण होता है जिससे वर्षा, ओलावृष्टि आदि मौसमी घटनाएं घटती है। हवायें भी मुख्यतः इसी मण्डल में प्रवाहित होती है। 
2. समताप मण्डल - यह पृथ्वी से लगभग 12-50 किमी तक उपस्थित है। इसके नाम से भ्रम होता है कि इसका तापमान एक समान होना चाहिए लेकिन ओजोन परत के द्वारा पराबैगनी किरणों के अवशोषण के कारण ऊचाई बढ़ने पर तापमान की वृद्धि होती है। इसका तापमान -60°C से 0°C तक होता है । इसके सबसे ऊपरी सतह पर दाब घटकर समुद्र के तल से वायुमण्डलीय दाब 1/1000 हो जाता है। इसी मण्डल में ओजोन की परत स्थित है। 

3. मध्य मण्डल - यह पृथ्वी से लगभग 50 - 80 किमी तक उपस्थित है। ऊचाई बढ़ने पर तापमान में कमी आती है। इसका औसत तापमान - 85°C है जबकि इसका न्यूनतम तापमान - 100°C है। इस तरह यह पृथ्वी का सबसे ठण्डा स्थान है। इसी मण्डल में भटके हुए छुद्र ग्रह जल उठते हैं जिन्हें उल्का पिण्ड कहा जाता है। 

4. आयन मण्डल - यह पृथ्वी से लगभग 80 - 700 किमी तक उपस्थित है। ऊंचाई बढ़ने पर इसके तापमान में लगातार वृद्धि होती है, जिससे इसका महत्तम तापमान 1500°C तक हो जाता है। गामा और एक्स किरणों के अवशोषण के कारण आयन का निर्माण होता है। इस तरह यहा द्रव्य की चौथी अवस्था प्लाज्मा उपस्थित होता है। पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र से क्रिया के कारण उत्तरी ज्योति एवं दक्षिणी ज्योति का निर्माण होता है।

5. बाह्य मण्डल - यह पृथ्वी से लगभग 700-10,000 किमी. तक उपस्थित है। इस मंडल में मुख्यतः हाइड्रोजन एवं हिलीयम जैसी हल्की गैसें उपस्थित हैं। गैसों का घनत्व नगण्य है। सैकड़ों किलोमीटर के बाद एक गैस के अणु को टक्कर दूसरे गैस से संभव होता है।

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