रूफटाॅप सोलर कार्यक्रम के विषय में जानकारी

 हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति ने वर्ष 2022 तक रूफटॉप सोलर ( आरटीएस ) परियोजनाओं से 40 , 000 मेगावाट की संचयी  क्षमता हासिल करने के लिए ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर कार्यक्रम के दूसरे चरण को स्वीकृति दे दी है ।

   क्या है ? 
   
 इस कार्यक्रम को 11 , 814 करोड़ रुपये की कुल केन्द्रीय  वित्तीय सहायता के साथ कार्यान्वित किया जाएगा ।  कार्यक्रम के दूसरे चरण में आवासीय क्षेत्र के लिए केन्द्रीय वित्तीय सहायता ( सीएफए ) का पुनर्गठन किया गया है ।
 
 इसके तहत 3 किलोवाट तक की क्षमता वाली आरटीएस प्रणालियों । के लिए 40 प्रतिशत सीएफए और 3 किलोवाट से ज्यादा एवं 10 किलोवाट तक की क्षमता वाली आरटीएस प्रणालियों के लिए 20 प्रतिशत सीएफए उपलब्ध कराई जाएगी । 
 
 ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों / आवासीय कल्याण संघों ( जीएचएस / आरब्ल्यू ) के मामले में साझा सुविधाओं को विद्युत आपूर्ति हेतु आरटीएस संयंत्रों के लिए सीएफए को 20 प्रतिशत तक सीमित रखा जाएगा । 

 हालांकि , जीएचएस / आरडब्ल्यू के लिए सीएफए हेतु मान्य क्षमत प्रति मकान 10 किलोवाट तक ही सीमित होगी। 
 
 इसके अंतर्गत अधिकतम कुल क्षमता 500 के KWP तक होजिसमें जीएचएस / आरडब्ल्यू किलो के अंतर्गत व्यक्तिगत मकानों में लगाए गए आरटीएस की क्षमता भी शामिल होगी । 
 
  आवासीय श्रेणी के तहत सीएफए 4000 मेगावाट की क्षमता के लिए मुहैया कराई जाएगी और यह मानक ( बेंचमार्क ) लागत या निविदा लागत , इनमें से जो भी कम हो , के आधार पर उपलब्ध कराई जाएगी । 
  
  केन्द्रीय वित्तीय सहायता अन्यल श्रेणियों यथा संस्थागत , शैक्षणिक , सामाजिक , सरकारी , वाणिज्यिक , औद्योगिक आदि के लिए उपलब्ध नहीं होगी । 
  
 कार्यक्रम के दूसरे चरण के अंतर्गत वितरण कंपनियों ( डिस्कॉम ) की ज्यादा सहभागिता पर फोकस किया जाएगा। 
 
   लाभ : - इस कार्यक्रम का कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में बचत  की दृष्टि से व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव पड़ेगा । 
   
  प्रति मेगावाट 1 . 5 मिलियन यूनिटों के औसत ऊर्जा उत्पादन को ध्यासन में रखते हुए यह उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2022 तक कार्यक्रम के चरण - 2 के तहत 38 गीगावाट ( जीडब्ल्यू ) की क्षमता वाले सोलर रूफटॉप संयंत्रों की स्थापना से प्रति वर्ष कार्बन | | डाई ऑक्साइड के उत्सगर्जन में लगभग 45 . 6 टन की कमी होगी । 

  इस कार्यक्रम के द्वारा स्व - रोजगार को बढ़ावा मिलने के अलावा वर्ष 2022 तक योजना के चरण के अंतर्गत 38 जीडब्ल्यू की क्षमता वृद्धि हेतु कुशल एवं अकुशल कामगारों के लिए 9 . 39 लाख रोजगारों के समतुल्य रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है ।

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