हाल ही में इस्लामी सहयोग संगठन ( Organisation of IslamicCooperation ) के देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अबू धाबी की आधिकारिक यात्रा संपन्न की । यह पहली बार है जब भारत को सम्मानित अतिथि के रूप में ओआईसी की बैठक में आमंत्रित किया गया ।
इस्लामिक सहयोग संगठन
इस्लामिक सहयोग संगठन 57 देशों का प्रभावशाली समूह है । 25 सितंबर 1969 को रबात में हुए ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन में ओआईसी की स्थापना हुई थी । संयुक्त राष्ट्र के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा अंतर - सरकारी संगठन है । पाकिस्तान इसके संस्थापक सदस्यों में शामिल है । इसका मुख्यालय सऊदी अरब के जेद्दा में है । यह संगठन इस्लामिक देशों के मध्य सभी विषयों में सहयोग को प्रोत्साहित करता है ।
उद्देश्य एवं कार्य
सदस्य देशों के मध्य आर्थिक सामाजिक सांस्कृतिक , वैज्ञानिक और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में इस्लामी एकजुटता को प्रोत्साहन देना तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से जुड़े सदस्यों के मध्य परामर्श की व्यवस्था करना ।
किसी भी रूप में विद्यमान उपनिवेशवाद की समाप्ति तथा जातीय अलगाव और भेदभाव की समाप्ति के लिये प्रयास करना । न्याय पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के विकास के लिये आवश्यक कदम उठाना ।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के प्रयासों में समन्वय स्थापित करना तथा फिलिस्तीन संघर्ष को समर्थन तथा उनके अधिकारों और जमीनों को वापसी में उन्हें सहायता देना ।
विश्व के सभी मुसलमानों की गरिमा , स्वतंत्रत और राष्ट्रीय अधिकारों की रक्षा करने के लिये उनके संघर्षों को मजबूती प्रदान करना , तथा सदस्य देशों और अन्य देशों के मध्य सहयोग और तालमेल को प्रोत्साहित करने के लिये एक उपयुक्त वातावरण तैयार करना ।
इस्लामिक देशों से संबद्ध महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करने के लिये प्रत्येक तीन वर्ष के अंतराल पर राष्ट्राध्यक्षों का सम्मेलन बुलाया जाता है ।विदेश मंत्रियों का सम्मेलन ओआईसी की प्रमुख संस्था है , जिसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि सम्मिलित होते हैं इसके अन्य कार्य इस प्रकार हैं |
संगठन की नीतियों की क्रियान्वित करना ।
गैर - सदस्यीय देशों के साथ संबंधों के लिये दिशा निर्देशों का निर्धारण करना और राष्ट्राध्यक्षों के सम्मेलन के विचार के लिये रिपोर्ट तैयार करना ।
इसके सचिवालय का प्रधान अधिकारी महासचिव होता है , जो विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के द्वारा चार वर्षों के लिये निर्वाचित होता है ।