हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक समिति ने अरुण - 3 जल विद्युत परियोजना ( नेपाल भाग ) के ट्रांसमिशन घटक के लिए जून , 2017 के मूल्य स्तर पर 1236 . 13 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निवेश को अपनी स्वीकृति दे दी है । इस परियोजना के अंतर्गत 70 मीटर ऊंचा गुरुत्वीय बांध और 11 . 74 किलोमीटर का हेड रेस सुरंग ( एचआरटी ) भूमिगत पावर हाउस के साथ नदी के बाएँ किनारे पर बनाया जाएगा और प्रत्येक 4 ईकाइयाँ 225 मेगावाट विद्युत उत्पादन करेंगी ।
पृष्ठभूमि
अरुण - 3 जल विद्युत परियोजना ( 900 मेगावॉट ) पूर्वी नेपाल के सनखुवासभा जिले में अरुण नदी पर है ।नेपाल सरकार और एसजेवीएन लिमिटेड ने परियोजना के लिए मार्च 2008 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया था ।यह समझौता ज्ञापन 30 वर्ष की अवधि के लिए बिल्ड ऑन ऑपरेट तथा ट्रांसफर ( बीओओटी ) के आधार पर किया गया था । 30 वर्ष की अवधि में 5 वर्ष की निर्माण अवधि शामिल है । परियोजना विकास समझौता ( पीडीए ) पर नवंबर 2014 में हस्ताक्षर किए गए ।इस समझौता में 25 वर्षों की संपूर्ण रियायत अवधि के लिए नेपाल को नि : शुल्क 21 .9 प्रतिशत विद्युत प्रदान करने का प्रावधान है ।
लाभ
परियोजना के ट्रांसमिशन घटक के निर्माण से लगभग 400 व्यक्तियों को रोजगार मिलेगा ।
यह परियोजना नेपाल के साथ आर्थिक संपर्क को मजबूत बनाने के लिए भारत को अधिशेष विद्युत प्रदान करेगी ।
इस परियोजना से बिजली नेपाल के धलकेबर से भारत के मुजफ्फरपुर में भेजी जाएगी ।
अरुण नदी
अरुण नदी कोसी नदी की एक महत्वपूर्ण उपनदी है ।यह तिब्बत के न्यालाम जिले में महालंगूर हिमाल की ढलानों में उत्पन्न होती है , जहाँ इसे फुग चु और बुम चु के नाम से जाना जाता है और फिर यह नेपाल में प्रवेश करती है , जहाँ इसका अधिकांश मार्ग स्थित है ।।