पृथ्वी पर लगभग प्रतिवर्ष लगभग 16000 अनुभव योग्य भूकंपे आते हैं। इन भूकम्पों में पांच प्रकार की तरंगे पन्न होती है - अवश्रव्य ,P , S , L तथा R तरंगे।
अवश्रव्य तरंगे (Infrasonic Waves)
ये 20Hz से कम आवृत्ति (Frequency) तथा दीर्घ तरंगदैर्घ्य (Long wavelength) एवं मनुष्य को सुनाई नहीं देने वाली तरंगे होती है। मनुष्य इसका अनुभव नहीं करता लेकिन कुछ जीव इसको सुनने की क्षमता रखते हैं।
» p तरंगें( PWaves )
इन्हें प्राथमिक तरंग (Primary Waves) कहते हैं , क्योकि भूकम्प के प्रभावी क्षेत्रों में सबसे पहले इन्हें ही अनुभव किया जाता है। इनका वेग सर्वाधिक 6.8 km/s होता है। ये लघु तरंगदैर्ध्य तथा उच्च आवृत्ति वाली तरंगे होती है। सभी माध्यमों में संचरित होने वाली ये सबसे तेज गति से संचरित होने वाली ध्वनि तरंगों की तरह अनुदैर्ध्य तरंगे (Longitudinal waves) होती हैं।
S तरंगे ( s Waves )
इन्हें द्वितीयक तरंग (Secondary waves) कहते हैं, क्योंकि भूकम्प के प्रभावी क्षेत्रों में ये प्राथमिक तरंगों के बाद पहुँचते हैं। ये तरंगे ठोस या तरल के ऊपरी तल पर ही संचरित होती है। ये भी लघु तरंगदैर्ध्य तथा उच्च आवृत्ति वाली तरंगे होती है। स्वभाव में ये प्रकाश तरंगों की तरह अनुप्रस्थ होती हैं। इनका वेग 4.4 km/s होता है। यहाँ स्मरणीय है कि ये प्रकाश तरंगों से पूर्णत: मेल नहीं खाती क्योंकि प्रकाश मी तरंगे अनुप्रस्थ के साथ विद्युत चुम्बकीय भी होती है।
L तरंगे ( LWaves )
इन्हें दीर्घ या लव तरंग कहते हैं। भूकम्प के प्रभावी क्षेत्रों में सबसे बाद में पहुंचने वाले तथा सर्वाधिक विनाशकारी तरंगे होती है। ये दीर्घ तरंगदैर्ध्य तथा निम्न आवृत्ति वाली तरंगे होती है। स्वभाव में ये प्रकाश तरंगों की तरह अनुप्रस्थ (Trans Verse) होती हैं। इनका वेग 3.8 km/s होता है।
R तरंगे (R Waves)
इन तरंगो को रेले तरंगे ( Rayleigh Waves ) भी कहते हैं क्योकि इनकी खोज रेले नामक वैज्ञानिक ने की थी। ये तरंगे अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्घ्य दोनों तरंगों के मेल से उत्पन्न होती हैं। इनका वेग सबसे कम 3.6 km/s होता है। तथा ये समुद्र की तरंगों की तरह लुढ़क कर चलती हैं।