भारत की साख आज गतिशीलता के लिए हुई है। वह चाहे अर्थव्यवस्था का क्षेत्र हो या विज्ञान व तकनीक का, हर क्षेत्र में भारत ने अपनी अलग पहचान बनाई है।
भारतीयों ने ये पहचान अपनी कड़ी मेहनत और ज्ञान के आधार पर अर्जित की है। इन सब कारणों से पासपोर्ट इंडेक्स में भी भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती साख को दिखाया गया है। दरअसल पासपोर्ट इंडेक्स ने वैश्विक स्तर पर ग्लोबल पासपोर्ट पॉवर रैंकिंग 2019 जारी किया है।
199 देशों की इस रैंकिंग में भारत को 67 वां संस्करण मिला है। नवीनतम रैंकिग के अनुसार विगत 5 वर्षों (2015 - 2019)में भारत की स्थिति में 10 पायदान का सुधार हुआ है। भारत की 2015 में 77वीं और 2018 में 68वीं रैंक थी।
भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती साख की वजह से अब भारतीय नागरिक 25 देशों में बिना वीजा (visa- free) के जा सकते हैं, और 39 देशों में भारतीय नागरिकों को आगमन पर वीजा मिलने की सुविधा मिल गयी है। अब भारतीयों को 134 देशों में जाने के लिए वीजा की आवश्यकता (visa required) होगी।
पासपोर्ट इंडेक्स 2019 की सूची के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) प्रथम पायदान पर है, जबकि जर्मनी दूसरे पायदान पर।
पासपोर्ट इंडेक्स----
पासपोर्ट इंडेक्स अपनी रैंकिंग वीजा मुक्त स्कोर और UNDP के मानव विकास सूचकांक (Visa - Free Score and UNDP human development index) के आधार पर तैयार करता है । शीर्ष 3 देशों की रैंकिंग इस प्रकार हैं - (1) यूएई, (2) जर्मनी, (3) फ्रांस/अमेरिका
पासपोर्ट पॉवर के मामले में सार्क देशों में भारत की रैंक मालदीव (51) के बाद दूसरी है। इसके बाद 'भूटान (69), नेपाल (82), श्रीलंका (83), बांग्लादेश (86), पाकिस्तान (91) और अफगानिस्तान (93) की रैंकिंग है। वैश्विक स्तर पर जैसे - जैसे पर्यटन और सांस्कृतिक संबंध में वैसे - वैसे वीजा पर स्वंत्रता बढ़ेगी। बशर्ते कि आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और परस्पर संबंध में सद्-भाव और शांति की स्थिति कायम रहे। दुनिया सकारात्मक आशा - प्रत्याशा पर जीवित रहती हैं। यद्यपि भारत का स्कैन सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और युएई की तुलना में काफी कम है, लेकिन भारत की साख लगातार वृद्धि से पासपोर्ट के मामले में रैंकिंग में और सुधार आयेगा। यह सुधार प्रक्रिया भारत के पर्यटन में वृद्धि लायेगा जिससे न केवल विश्व स्तर पर देश की गरिमा बढ़ेगी अपितु विदेशी मुद्रा की आवक भी बढ़ेगी, जो देश के विकास के लिए एक संजीवनी साबित होगी।