संदर्भ
हाल ही में पुलवामा में आतंकवादी कार्रवाई के पश्चात् भारत ने पाकिस्तान को 1996 में दिए गये मोस्ट फेवर्ड नेशन के दर्जे को वापस ले लिया है और पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि यदि वह भारत के विरुद्ध आतंकी कार्रवाई का समर्थन करता रहेगा तो ऐसे और कठोर उपाय किये जाएँगे ।
क्या है ?
मोस्ट फेवर्ड नेशन वह दर्जा है जो एक देश दूसरे देश को देता है और जिसके अनुसार उन दोनों के बीच व्यापार में भेदभाव नहीं किया जाता है । इसके बारे में शुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौते के तहत पहले अनुच्छेद में ही वर्णित किया गया है । विश्व व्यापार संगठन के नियमों के तहत कोई सदस्य देश अपने व्यापार भागीदारों के बीच भेदभाव नहीं कर सकता है । यदि किसी एक व्यापार भागीदार को विशेष दर्जा दिया जाता है तो यह दर्जा विश्व व्यापार संगठन के सभी सदस्यों को मिलना चाहिए ।
लाभ
इसका दर्जा विकासशील देशों के लिए अत्यंत ही लाभप्रद होता है । ऐसे देशों को अपने माल के लिए बड़ा बाजार मिल जाता है तथा घटे हुए शुल्क और व्यापारिक व्यवधानों में कमी के कारण उन्हें निर्यात पर कम लागत आती है । अत : उनका व्यापार अधिक प्रतिस्पर्धात्मक अर्थात् लाभकारी हो जाता है । इसमें नौकरशाही की अड़चनें कम हो जाती हैं और अनेक प्रकार के शुल्क के बदले सभी आयातों के लिए एक समान शुल्क लग जाता है ।
इससे व्यापार की सामग्रियों की माँग बढ़ जाती है और इस प्रकार अर्थव्यवस्था और आयात प्रक्षेत्र को बढ़ावा मिलता है। यह व्यापार सुरक्षावाद के चलते अर्थव्यवस्था पर होने वाले दुष्प्रभाव को भी ठीक करता है । इससे घरेलू बाजार में भी लाभ होता है ।सभी देशों के लिए एक ही प्रकार का शुल्क होने से नियम अधिक सरल और अधिक पारदर्शी हो जाते हैं । यह देशों के बीच अभेदभाव को बढ़ावा देता है , इसलिए यह कुल मिलाकर मुक्त व्यापार के लक्ष्य को भी पोषित करता है ।
हानियाँ
इससे सबसे बड़ी हानि यह है कि यह दर्जा देने वाले देश को उन सभी देशों के साथ समान व्यवहार करना पड़ता है जो WTO के सदस्य हैं । इसका अभिप्राय यह हुआ है कि उस देश के घरेलू उद्योग में मूल्य का युद्ध छिड़ जाता है जिससे स्थानीय व्यापार को घाटा होता है । बाहर से आने वाली सामग्रियाँ सस्ती होती हैं , अत : अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए घरेलू बाजार को दाम घटाना पड़ता है और फलत : आर्थिक हानि का सामना करना पड़ता है ।