*विलियम हार्वे नामक वैज्ञानिक द्वारा रक्त परिसंचरण की खोज की गई थी। रक्त परिसंचरण तंत्र को मुख्य रूप से तीन भागों यथा हृदय, रुधिर तथा रुधिर वाहनों में बांटा जा सकता है।
* मानव हृदय छाती के मध्य थोड़ा सा भाई और स्थित होता है। पेसीय ऊतकों का बना यह अंग एक आवरण द्वारा घिरा होता है जिसे हृदयावरण कहते हैं। इसमें पेरिकार्डियल दर्द भरा होता है, जो हृदय की आघातो से रक्षा करता है। * हृदय चार प्रमुख पक्षों में विभाजित होता है। दो ऊपरी कछों को दाया तथा बाया अलिंद कहते हैं जबकि दो निचले कछों को दाया एवं बाया निलय कहते हैं।
* एक सामान्य मनुष्य के हृदय का वजन लगभग 250 ग्राम से 300 ग्राम होता है। * सामान्यता मनुष्य का हृदय प्रति मिनट 72 से 75 बार धड़कता है। हृदय में एक स्पंदन की समाप्ति से लेकर अगले स्पंदन की समाप्ति तक एक हृदय चक्र होता है। * हृदय एक पंप की तरह कार्य करता है इसका प्रमुख कार्य शरीर के विभिन्न भागों को रक्त पहुंचाना है।
* हृदय से रक्त धमनियों द्वारा शरीर के विभिन्न भागों को जाता है तथा वहां से शिराओं के द्वारा वापस आता है।
* शुद्ध या ऑक्सीजन युक्त रक्त फेफड़ों से हृदय में आता है। हृदय इस रक्त को धमनियों के द्वारा पूरे शरीर में पहुंचाता है। * शरीर के रक्त मिला अक्सीजन प्रयुक्त हो जाता है और अशुद्ध या ऑक्सीजन रहित रक्त शिराओं द्वारा फिर हृदय की और आता है।