किस मुगल बादशाह के दुर्भाग्य पर व्यंग करते हुए लेनपूल ने लिखा है कि वहजीवन जीवन भर ठोकरें खाता रहा और ठोकर खाकर ही उसकी जीवन का अंत हुआ ?

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