समाज के कमजोर वर्ग के लिए विभिन्न आयोगों की बहुलता, अतिव्यापी अधिकारिता और प्रक्रिया के दोहरेपन की समस्याओं की ओर ले जाती है। क्या यहा बेहतर होगा कि सभी आयोगों को एक व्यापक मानवाधिकार आयोग के क्षत्र में विलय कर दिया जाय? टिप्पणी किजिए।

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