मापतौल का इतिहास
विश्व में प्राचीन समय में माापतौल की अलग-अलग पद्धतियां प्रचलित थी जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वस्तुओं को नापने तोलने के संबंध में अव्यवस्था बनी रहती थी। इस अव्यवस्था को दूर करने के लिए 20 मई 1875 को 17 यूरोपीय देशों की बैठक फ्रांस की राजधानी पेरिस के सेवर्स नामक स्थान पर हुई थी। इस बैठक में उपस्थित वैज्ञानिकों ने लंबाई, द्रव्यमान और समय को मूल राशि (fundamental quantities) के रूप में स्वीकार किया
तथा मीटर समझौते की प्रारूप पर हस्ताक्षर किए।
मीटर समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मापतौल से संबंधित मात्रकों को निर्धारित करने और उनकी देखभाल के लिए निम्न संस्थानों की स्थापना की गई थी।
1. मापतौल का महासम्मेलन
2. मापतौल का अंतरराष्ट्रीय कार्यालय
3. मापतौल की अंतरराष्ट्रीय समिति
1. मापतौल का महासम्मेलन ( general conference on weights and measures) :-
• इसे सीजीपीएम (CGPM) के नाम से भी जाना जाता है।
• यह माप तोल के मानकों को निर्धारित करने और उनमें परिवर्तन करने के लिए सर्वोच्च प्राधिकृत संगठन है।
• इसमें 51 देश सम्मिलित हैं और इस संगठन की बैठकें प्रत्येक 4 या 6 वर्षों के अंतराल पर होतीे हैं।
• भारत इसका सदस्य है और इसका मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस के सेवर्स नामक स्थान पर है।
2. मापतौल का अंतरराष्ट्रीय कार्यालय (international Bureaue of weights and measures)
• इसे बीआईपीएम के नाम से भी जाना जाता है।
• यह मापतोल के मानकों का अनुरक्षण (maintenance) करता है
3. मापतौल की अंतरराष्ट्रीय समिति (international commitee for weights and measures)
• सीआईपीएम (CIPM) के नाम से भी जाना जाता है।
• यह मापतौल का महासम्मेलन (CGPM )का एक प्रशासनिक निकाय है।
• इसकी बैठकें प्रतिवर्ष BIPM में आयोजित होती है।
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