क्रमशः..
Day – 37
- संविधान की प्रस्तावना में निम्नलिखित तीन संकल्प अन्तर्निहित है –
- भारत राष्ट्र की रचना का संकल्प
- नागरिक अधिकारों को सुलभ कराने का संकल्प
- संविधान के अंगीकरण की तिथि का संकल्प
- प्रस्तावना का मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता को निम्नलिखित अधिकार दिलाना है –
- न्याय - सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक।
- स्वतंत्रता - विचार, मत, विश्वास तथा धर्म की।
- समानता - पद एवं अवसर की।
- बन्धुत्व - व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता के लिए।
- भारतीय संविधान में प्रस्तावना या उद्देशिका के अतिरिक्त मूल संविधान में 395 अनुच्छेद तथा 8 अनुसूचियाँ थीं।
- संविधान की उद्देशिका में संविधान के ध्येय और उसके आदर्शो का संक्षिप्त वर्णन है।
- उद्देशिका में लिखित "हम भारत के लोग......... इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते है।" शब्द भारत के लोगों की सर्वोच्च सम्प्रभुता की घोषणा करते हैं।
- भारत को 26 जनवरी, 1950 को एक गणराज्य घोषित किया गया जिसका तात्पर्य है कि भारत का राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित होगा, आनुवांशिक नहीं।
- उद्देशिका को न्यायालय में प्रवर्ती नहीं किया जा सकता।
- जहाँ संविधान की भाषा संदिग्ध प्रतीत होती हो, वहाँ उद्देशिका की सहायता ली जा सकती है।
- उद्देशिका को संविधान के भाग के रूप में मान्यता दिये जाने से संविधान के निर्वचन में सहायक के रूप में इसका महत्व बढ़ गया है। किन्तु इस सम्बन्ध में निम्नलिखित प्रस्थापनाएं लागू होंगी-
- उद्देशिका शक्ति का स्रोत नहीं है शक्ति का आधार कोई विनिर्दिष्ट उपबन्ध ही हो सकता है।
- उद्देशिका को विधान मंडल की शक्तियों पर प्रतिबंध या मर्यादा लगाने का स्रोत नहीं बनाया जा सकता है।
- उद्देशिका में बन्धुता को दो बातों में जोड़ा गया है - (क) व्यक्ति की गरिमा सुनिश्चित करना, और (ख) राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करना।
विशेष :- इसमें कुछ और बातेंं जो रह गयी है, फिर किसी दिन नये नोट्स में बता दी जायेंगी।
(भारतीय संविधान की प्रस्तावना या उद्देशिका) का अध्याय यही पर समाप्त करते है,और अब हम आगे बढ़ते है संविधान भाग -1 'संघ और उसका राज्य-क्षेत्र' के विषय पर ।