राजधानी में बीएस- VI ईंधन का उपयोग करने का निर्णय

राजधानी में बीएस- VI ईंधन का उपयोग करने का निर्णय

·        पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय

·        सर्दियों में दिल्‍ली में प्रदूषण की स्थिति अत्‍यंत चिंताजनक हो जाने के तथ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए राजधानी में बीएस- VI ईंधन का उपयोग अप्रैल 2020 के बजाय 1 अप्रैल 2018 से ही करने का निर्णय लिया।

·        बीएस- VI  ईंधन लागू करने वाला दिल्ली देश का पहला शहर बन गया जहाँ ऐसे ईंधन की बिक्री शुरू कर दी गयी |

·        1 अप्रैल 2019 से देश के 13 बड़े शहरो में लागु होगा एवं 2020 से पूरे देश में अनिवार्य कर दिया जाएगा |

·        1 अप्रैल 2020 के बाद से देश में सभी वाहन केवल बीएस- VI के ही बनाये एवं बिक्री किये जा सकते है अभी सिर्फ मर्सिडीज ही ऐसी कम्पनी है जो अपने सभी वाहनों में बीएस- VI मानक के इंजन का प्रयोग कर रही है |

·        बीएस- VI ईंधन से वर्तमान बीएस- IV की तुलना में सल्‍फर का स्‍तर पांच गुना कम हो जाएगा यानी इसमें 80 प्रतिशत की कमी होगी, जिसकी बदौलत यह ईंधन अत्‍यंत स्‍वच्‍छ है।

·        इससे सड़कों पर चलने वाले वर्तमान वाहनों, यहां तक कि पुराने वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी काफी घट जाएगा।

·        बीएस- VIईंधन सीएनजी जैसा स्‍वच्‍छ है और कुछ मायनों में तो यह सीएनजी से भी ज्‍यादा स्‍वच्‍छ है।

·        बीएस- VI ईंधन का उपयोग शुरू करने के साथ ही भारत भी एशिया-प्रशांत राष्‍ट्रों यथा जापान, दक्षिण कोरिया, हांगकांग, ऑस्‍ट्रेलिया, न्‍यूजीलैंड, फिलीपींस और चीन की छोटी सूची में शामिल हो गया है।

·        चीन केवल भारी वाहनों में ही बीएस- VI ईंधन का उपयोग कर रहा है।

बीएस- VI मानक:-

·        बीएस- VI यानी भारत स्टेज मोटर वाहनों और इंजनो के लिए एक मानक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है |

·        बीएस- VI मानक में बीएस- IV मानक के मुकाबले सल्फर की मात्रा 4 से 5 गुना तक कम हो जाती है इसी लिए इस ईंधन को क्लीन फ्यूल कहा जाता है |

·        देश में बीएस मानक तय करने की ज़िम्मेदारी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की है तथा इसी के अंतर्गत आने वाला केंद्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड पर मानक को बनाने और लागू कराने की ज़िम्मेदारी होती है |

·        बीएस(भारत स्टेज) मानक यूरोपियन उत्सर्जन मानक नियमो पर आधारित है ये उत्सर्जन मानक गाड़ी में लगे इंजन के प्रदुषण की क्षमता को दर्शाता है |

·        अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार हवा में 2.5 पीएम में 60 एमजीसीएम की होनी चाहिए जिसमे बीएस- VI फ्यूल में 20 से 40 तथा बीएस- IV फ्यूल में यह 120 होती है |

·        1980 में पहली बार देश में मानक पर बहस शुरू हुयी |

·        साल 2000 में यूरो मानक1 (या भारत 2000 मानक लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया) लागू किये गये जिसके बाद 2005 से देशभर में बीएस- 2 मानक लागू किये गये |

·        2010 में बीएस- 3 मानक लागू किये गये (2005 में दिल्ली में), 2010 में दिल्ली एवं 2017 में पूरे देश में बीएस- 4 लागू किये गये अब बीएस- V को छोड़ कर सीधे बीएस- VI मानक दिल्ली में लागू किया गया है |

बीएस- VI मानक लागू करने से क्या होगा फायदा:-

·        हवा में प्रदुषण कम होगा

·        साँस लेने में सुविधा होगी

सल्फर की मात्रा घाट कर 10% रह जाएगी जो बीएस- IV व बीएस- III के मुकाबले 80%कम हो जाएगी |
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