मिनीमाता संधि

मिनीमाता संधि

मुख्य बिन्दु:-

  • 2009 यूएनईपी के तत्वधान में कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि है ।
  • यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को पारे के दुष्प्रभाव से बचाने वाली वैश्विक संधि है ।
  • इसके हस्ताक्षरकर्ता राष्ट्र 128 एवं
  • प्रमाणिक कर्ता राष्ट्र 92 है ।
  • फरवरी 2009 में, यूएनईपी की गवर्निंग काउंसिल ने पारा पर वैश्विक साथ ही कानूनी रूप से बाध्यकारी उपकरण के विकास पर 25/5 निर्णय से अपनाया।
  • अंतर सरकारी वार्ता समिति (आईएनसी 5) के पांचवें सत्र में वार्ता के समापन के बाद, 10 से 11 अक्टूबर 2013 तक जापान के कुमामोटो में आयोजित एक राजनयिक सम्मेलन (प्लेनिपोटेंटियरीज़ का सम्मेलन Conference of Plenipotentiaries), में 9 अक्टूबर 2013 को मिनमाटा में औपचारिक उद्घाटन के साथ यह हस्ताक्षर के लिए समझौता अपनाया और खोला गया, राजनयिक सम्मेलन पहले कुमामोटो में 7 से 8 अक्टूबर 2013 तक एक प्रारंभिक बैठक द्वारा किया गया था।

पृष्ठभूमि:-

·        जापान के शहर मिनीमाता में पारे अर्थात मर्करी के प्रदूषण के कारण वहां के लोगो मे रोग का विस्तार हो गया जिसका नाम ही मिनीमाता बीमारी रख दिया गया । इस बीमारी से 10 हजार लोग इस जहरीली धातु की चपेट में आए, एवं एक स्थानीय फैक्ट्री से निकलने वाले कचरे से प्रदूषित पानी की मछलियां और घोंघे खाने के कारण इनमें से अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है ।

  • इसी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने 2009 में इस संधि को अपना लिया ।
  • इस सन्धि के अनुसार 2025 तक पारे के प्रदूषण को कम करने का लक्ष्य रखा गया हैं ।
  • इस के क्रियान्वयन के लिए ग्लोबल एनवायरनमेंट फेसेलिटी द्वारा वित्त की भी सहायता भी दी जाती हैं ।
  • यह संधि 2017 से पूरी तरह लागू हो चुकी है भारत ने फरवरी 2018 को इसको प्रमाणित (रैटिफाई) कर दिया है।
  • इस सम्मेलन में विश्व के 140 देशों ने भाग लिया था ।
  • पारे पर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा आयोजित इस तरह का यह पहला सम्मेलन है |
  • सम्मेलन में प्रतिनिधयों द्वारा इस बेहद जहरीली धातु पारे के लिए पहली बार दुनिया में कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते पर दस्तखत किए, हालांकि समझौते को लागू करने के लिए 50 देशों द्वारा इसकी पुष्टि जरूरी थी जो अब 92 देश कर चुके हैं ।

मुख्य उद्देश्य:-

  • पारे पर मीनामाता सम्मेलन (Minamata Convention on Mercury) का मुख्य उद्देश्य पारे एवं पारे के अन्य यौगिकों के उत्सर्जन से होने नुकसान से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा करना है |
  • इस सम्मेलन में वर्ष 2025 तक, पारा वर्धित उत्पादों के निर्माण, पारे का आयात या निर्यात, एवं पारे की अन्य बहुत सी चीजों को धीरे-धीरे खत्म करने की बात कही गई, सरकारों को पारे का खनन रोकने के लिए 15 वर्ष का समय दिया गया |

मीनामता सम्मेलन निम्नलिखित क्षेत्रों को नियंत्रित करने का प्रावधान करता है:-

    i.     पारा के वैश्विक खनन और व्यापार

   ii.     पारा वर्धित उत्पादों का विनिर्माण,

  iii.     उत्पादों और औद्योगिक प्रक्रियाओं में पारा का उपयोग

  iv.     आर्टिसेनल (Artisanal) और छोटे पैमाने पर सोने के खनन से उत्सर्जन को कम करने के लिए उठाए जाने वाले उपाय

   v.     वातावरण में पारा और परे के योगिकों के उत्सर्जन के स्रोत

  vi.     कोयला आधारित बिजली संयंत्र

  vii.     कोयला आधारित औद्योगिक बॉयलर

 viii.     अलौह धातुओं के प्रगलन और उत्पादन में प्रयुक्त प्रक्रिया

  ix.     सीमेंट क्लिंकर उत्पाद

पारे से होने वाली हानियां:-

    i.     पारा शिशुओं के विकास पर प्रभाव डालता है

   ii.     शिशुओं की वृद्धि रूक सकती है और दिमाग पर असर होता है

  iii.     ब्लड प्रेशर में इजाफा, हार्ट बीट भी बढ़ जाती है

  iv.     सुनने और देखने में परेशानी

   v.     उल्टी की समस्या हो सकती है |

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