न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी को उन्हें अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पुन: निर्वाचित

न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी को उन्हें अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पुन: निर्वाचित

अंतरराष्‍ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र का प्रधान न्यायिक अंग है और इस संघ के पांच मुख्य अंगों में से एक है। इसकी स्थापना संयुक्त राष्ट्रसंघ के घोषणा पत्र के अंतर्गत हुई है। इसका उद्घाटन अधिवेशन 18 अप्रैल 1946 ई. को हुआ था। इस न्यायालय ने अंतर्राष्ट्रीय न्याय के स्थाई न्यायालय की जगह ले ली थी। न्यायालय हेग में स्थित है और इसका अधिवेशन छट्टियों को छोड़ सदा चालू रहता है। न्यायालय के प्रशासन व्यय का भार संयुक्त राष्ट्रसंघ पर है।
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में समान्य सभा द्वारा 15 न्यायाधीश चुने चाते है। यह न्यायाधीश नौ साल के लिए चुने जाते है और फ़िर से चुने जा सकते है।
अंतरर्राष्ट्रीय न्यायालय संविधि में सम्मिलित समस्त राष्ट्र अंतरर्राष्ट्रीय न्यायालय में वाद प्रस्तुत कर सकते हैं।
इसका क्षेत्राधिकार संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणापत्र अथवा विभिन्न, संधियों तथा अभिसमयों में परिगणित समस्त मामलों पर है।
अंतरर्राष्ट्रीय न्यायालय संविधि में सम्मिलत कोई राष्ट्र किसी भी समय बिना किसी विशेष प्रसंविदा के किसी ऐसे अन्य राष्ट्र के संबंध में, जो इसके लिए सहमत हो, यह घोषित कर सकता है कि वह न्यायालय के क्षेत्राधिकार को अनिवार्य रूप में स्वीकार करता है। उसके क्षेत्राधिकार का विस्तार उन समस्त विवादों पर है जिनका संबंध संधिनिर्वचन, अंतरर्राष्ट्रीय विधि प्रश्न, अंतरर्राष्ट्रीय आभार का उल्लंघन तथा उसकी क्षतिपूर्ति के प्रकार एवं सीमा से है।
नोट:- यह विषय कुछ पुराना हैं प्रीलिम्स के लिए महत्वपूर्ण हैं, इस समय प्रीलिम्स के केवल 28 दिन ही बचे हैं तो उसी को ध्यान में रखते हुए जो जो भी विषय अवश्यक हैं उन्ही को मैं पोस्ट कर रहा हूँ 3 जून की परीक्षा के बाद आपको दिन-प्रति-दिन की सारी ख़बरे मिलने लगेंगी | धन्यवाद |

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