ग्रीन पीस के बारे में –
- 1971 में एक शांतिपूर्ण एवं हरी-भरी दुनिया का सपना लिए कार्यकर्त्ताओ का एक छोटा सा दल – वैंकुवर , कनाडा से एक पुरानी फिशिंग बोट से, अलास्का के पश्चिमी तट एमचिटा में अमेरिका द्वारा भूमिगत परमाणु परिक्षण के आकड़ें जुटाने निकला था | इस दल को ही ग्रीन पीस कहा जाता हैं |
- यह एक गैर-सरकारी संगठन है जो वैश्विक पर्यावरण को लेकर जागरूकता और प्रचार करता है |
- इसका मुख्यालय – एम्सटरड्रम- नीदरलैंड में है |
- 50 लाख लोग समर्थक एवं 42 देशो में राष्ट्रीय व क्षेत्रीय कार्यालय है |
- यह ग्लोबल रिस्क इंडेक्स( वैश्विक जोखिम सूचकांक) जारी करता है |
- ग्रीन पीस पूरी तरह से स्वत्रंत हैं एवं अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए किसी भी देश से किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता नहीं लेता हैं परन्तु यह व्यक्तिगत रूप से दिए गए अनुदान को स्वीकार करता हैं |
- यह किसी भी देश पर कोई बाध्यकारी नीति को लागू नहीं करता हैं केवल सुझाव देता हैं एवं पर्यावरण प्रदूषण से निपटने के उपायों को भि सुझाता हैं |
- यह संयुक्त राष्ट्र से पूरी तरह से अलग है |
- यह किसी भी प्रकार की कोई भी वित्तीय सहायता नहीं देता हैं |
- इसका मुख्य उदेश्य पर्यावरण संरक्षण, उर्जा सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, जंगल दोहन की प्रवृति को कम करना, विषाक्त मुक्त भविष्य एवं सतत स्थाई कृषि व्यवस्था को बढ़ावा देना जैसे पर्यावर्णीय कार्यो को करता हैं |
चर्चा का कारण :- ग्रीन पीस(वायु गुणवत्ता) रिपोर्ट भारत के बारे में
- 47% आबादी के इलाके में वायु गुणवत्ता मानिटरिंग नहीं होती है |
- 16% आबादी को ही रियल टाइम प्रदूषण आकडे उपलब्ध होते है |
- 300 शहरो में मैनुवल तरीके से आकड़ें एकत्र किया जाता है |
- pm(पार्टिकुलेट मैटर) के औसत पर – दिल्ली सबसे प्रदूषित शहर है |
- प्रदूषण मापने में कार्बन डाई आक्साईड को शामिल नहीं किया जाता हैं |