विश्‍व का पहला विश्‍वसनीय डिजिटल भंडार

विश्‍व का पहला विश्‍वसनीय डिजिटल भंडार

  • संस्‍कृति मंत्रालय की राष्ट्रीय सांस्कृतिक दृश्‍य-श्रव्‍य अभिलेखागार (एनसीएएपरियोजना को विश्‍व का पहला विश्‍वसनीय डिजिटल भंडार का प्रमाण-पत्र प्राप्‍त हुआ है। इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय कला केन्‍द्र (आईजीएनसीए) द्वारा कार्यान्वित इस परियोजना को ब्रिटेन की संस्‍था, प्राइमरी ट्रस्‍टवर्दी डिजिटल रिपॉजिटरी ऑथराइजेशन बॉडी लिमिटेड (पीटीएबी) ने आईएसओ 16363 : 2012 का प्रमाण-पत्र दिया है।
  • एनसीएए का मूल उद्देश्‍य ऑडियोविजुअल सामग्री के रूप में विद्यमान भारत की सांस्‍कृतिक विरासत की पहचान करना और इसे डिजिटल माध्‍यम से संरक्षित करना है।
  • मार्च 2018 तक 30,000 घंटों की अप्रकाशित तथा गैर व्‍यवसायीकृत ऑडियोविजुअल सामग्री को ऑनलाइन  उपलब्‍ध कराया जाएगा। 
  • एनसीएए का पायलट डिजिटल भंडार, पुणे की संस्‍था सी-डेक की सहयोगी सेंटर ऑफ एक्‍सि‍लेंस फॉर डिजिटल प्रि‍जर्ववेशन के सहयोग से तैयार किया गया है। एनसीएए डिजिटल भंडार की स्‍थापना डिजिटालय के सहयोग से की गई है जिसे सी-डेक, पुणे ने विकसित किया है।
  • इसका कार्यान्‍वयन ओपन आर्किवल इन्‍फोरमेशन सिस्‍टम (ओएआईएस) संदर्भ मॉडल आईएसओ 14721 : 2012 के निर्देशों के तहत किया गया है।
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