विशेष राज्य का दर्जा
मुद्दा:-
- आंध्र प्रदेश के सांसद लगातार यह मांग कर रहे हैं कि आंध्र प्रदेश राज्य को “विशेष राज्य का दर्जा” दिया जाए जिसके लिए उन्होने लगातार संसद में हंगामा किया और काम काज को रोक रखा है |
केंद्रीय सहायता “विशेष राज्य” और “सामान्य राज्य” में कुछ सबसे प्रमुख अंतर निम्न है:-
- सामान्य राज्य को 70 % कर्ज के तौर पर और 30 फ़ीसदी मदद के तौर पर, वही विशेष राज्य को 10% कर्ज के तौर पर और 90 फ़ीसदी वित्तीय मदद और अनुदान के रूप में केंद्रीय सहायता मिलती हैं |
- विशेष राज्य में निजी पूंजी उद्योग के तहत अगर कोई उद्योग स्थापित होता है तो उसे उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क, आयकर, विक्रीकर, कॉर्पोरेट टैक्स आदि में खास छूट दी जाती है, जिससे वहां उद्योगों को ज्यादा बढ़ावा मिलता है |
विशेष राज्य दर्जा देने के कुछ मापदंड:-
- दुर्गम इलाके वाला पर्वतीय भूभाग हो,
- राज्य का कोई खास हिस्सा किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा हो,
- प्रति व्यक्ति आय और गैर कर राजस्व काफी कम हो,
- आधारभूत ढांचे का अभाव हो,
- जनजातीय आबादी की बहुलता हो लेकिन आबादी का घनत्व कम हो,
- राज्य का पिछड़ापन हो भौगोलिक स्थिति और दूसरी सामाजिक स्थिति भी आधार हैं |
- विशेष राज्य दर्जा देने का मुख्य उद्देश्य “किसी भी राज्य का पिछड़ापन और असमानता को दूर करना होता है |”
- भारतीय संविधान में किसी भी विशेष श्रेणी राज्य के दर्जे का उल्लेख नहीं है या कोई भी प्रावधान नहीं है |
- लेकिन पहले का योजना आयोग (नीति आयोग) और राष्ट्रीय विकास परिषद यह मानते हुए कि कुछ राज्य दूसरे राज्यों से पिछड़े हुए हैं उन्हें अनुच्छेद 370 और 371 के अंतर्गत विशेष राज्य का दर्जा दिया जा सकता है |
- विशेष राज्य के दर्जे में दो बातों का उल्लेख होता है इसमें-
- विशेष राज्य एक (स्पेशल स्टेट)
- विशेष श्रेणी राज्य दर्जा (स्पेशल स्टेटस कैटेगरी)
विशेष राज्य एक (स्पेशल स्टेट):-
- विशेष राज्य का दर्जा संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत दिया जाता है जिसके लिए भारत की संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई, विशेष बहुमत के पास होने के बाद मिलता है जैसा जम्मू कश्मीर के संदर्भ में है |
- जिसमे देश के दूसरे राज्यों की तरह सभी कानून लागू नहीं होते हैं |
- रक्षा, विदेश नीति, वित्त और संचार मामलों में ही केंद्र सरकार की दखल हो सकती है |
- संघ व राज्य के समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र कानून नहीं बना सकता है |
- किसी भी तरह के केंद्र द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू कराने के लिए राज्य की सहमति जरूरी होती है |
विशेष श्रेणी के राज्य :-
- 1969 में राष्ट्रीय विकास परिषद की ओर से या व्यवस्था की गई थी जिसमें विषम भोगोलिक और पर्वतीय इलाकों को विशेष सहायता का प्रावधान किया गया था |
- जम्मू-कश्मीर और उत्तर पूर्व के राज्य समेत अभी तक कुल 11 राज्यों को विशेष श्रेणी राज्य का दर्जा दिया जा चुका है |
- विशेष श्रेणी के राज्य में केवल केंद्रीय वित्त एवं आर्थिक सहयोग में ही छूट मिलती है किसी भी अन्य तरह की नियम या कानूनों (जम्मू कश्मीर की तरह) में छूट नहीं प्रदान की जाती है |
- संविधान के भाग 21 में अनुच्छेद 371(A) से लेकर अनुच्छेद 371(J) 12 राज्यों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं |
- महाराष्ट्र, गुजरात, नागालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, सिक्किम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक, और गोवा विशेष राज्य एक (स्पेशल स्टेट) का दर्जा प्राप्त है |
- विशेष राज्य का दर्जा 1969 में पांचवी पे कमीशन की सिफारिश पर प्रारंभ किया गया यह दर्जा दिया जाने के लिए नेशनल डेवलपमेंट कौंसिल से निर्णय लिया जाता है और इस पर गाडगिल नियम लागू होता है |
मूल गाडगिल फार्मूला:-
- जम्मू कश्मीर और नागालैंड को सबसे पहले केंद्रीय योजनाओं को विशेष लाभ देने की बात की गई |
- 1974 से 1979 के मध्य पांचवी पंचवर्षीय योजना के तहत हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम, और त्रिपुरा को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया |
- 1990 की वार्षिक योजना में अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम को विशेष श्रेणी का दर्जा दिया गया |
- तथा 2001 में उत्तराखंड को जो विशेष श्रेणी का दर्जा प्राप्त करने वाला अभी तक का आखिरी राज्य हैं |
- 2015-16 में 14वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद राज्य को मिलने वाला हिस्सा केंद्र सरकार के कर संग्रह में से राज्य का हिस्सा 32 फ़ीसदी से बढ़कर 42 फ़ीसदी कर दिया गया है |
- 1969 में राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में बी आर गाडगिल समिति ने विशेष राज्य के दर्जे का सुझाव दिया था जिसे स्वीकृति प्रदान की गयी थी |
डी आर गाडगिल समिति की रिपोर्ट/ सिफारिस:-
- असम, जम्मू कश्मीर और नागालैंड जैसी विषम परिस्थितियों वाले राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाए एवं अनुदान देने में प्राथमिकता बरती जाये इसके बाद बचे संसाधनों में से |
- 60 फ़ीसदी जनसंख्या के आधार पर
- 7.5 उस राज्य से मिलने वाले कर आधार पर
- 25 फ़ीसदी राज्य के प्रति व्यक्ति आय के आधार पर
- 7.5 फ़ीसदी विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संसाधनों को वितरित किए जाए |
संघ और राज्य से सम्बन्धित कुछ संस्थाए:-
- 1950 में योजना आयोग का गठन किया गया जो 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग में बदल दिया गया |
- 1992 राष्ट्रीय विकास परिषद बनाई गई इसका काम राज्यों को योजनाओ के निर्माण में भागीदार बनाना है |
- राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत देश को 5 भागों में बांटा गया और सभी के लिए क्षेत्रीय विकास परिषद का गठन किया गया |
- 1986 में राष्ट्रीय एकता एकता परिषद का गठन किया गया |
- अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग का गठन किया जाता है जो अभी तक की सबसे ससक्त और मजबूत संस्था है |
नोट :- यह विषय upsc के साथ साथ एसएससी, रेलवे सभी पीसीएस के लिए भी अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं परन्तु मैंने upsc के आलावा कोई भी टैग नहीं दे रहा हूँ लेकिन ये फायेदेमंद सभी के लिए होंगे, आपका आज का दिन आपकी उम्मीदों के अनुसार ही गुजरे इसी कामना के साथ मिलते हैं अगले दिन किसी नए समसामयिक विषय के साथ | धन्यवाद |