केंद्र सरकार ने एक प्रत्याशी के दो सीटों से चुनाव लड़ने का सुप्रीम कोर्ट में समर्थन किया
क्या था मामला
- केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि एक उम्मीदवार को दो लोकसभा या विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की इजाजत देने का नियम जायज है।
- केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर जन प्रतिनिधि कानून की धारा-33 (7) को सही बताया है। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि एक उम्मीदवार को एक से अधिक सीटों पर लड़ने की इजाजत देने का प्रावधान सही नहीं है।
- सरकार ने अपनी दलील में कहा कि जनप्रतिनिधि कानून उम्मीदवार को एक से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की अनुमति देता है। इस प्रावधान में संशोधन करना उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन होगा।
क्या कहते हैं नियम
- जनप्रतिनिधि अधिनियम, 1951 की धारा 33 (7), एक व्यक्ति को आम चुनाव या उप-चुनावों में एक या दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ने की अनुमति देता है, जबकि अधिनियम की धारा 70, निर्दिष्ट करती है कि यदि कोई व्यक्ति संसद के सदन में या राज्य विधानमंडल के सदन में एक से अधिक सीटों पर चुना गया, तो वह चुनाव में जीती सीटों में से केवल एक ही रख सकता है।
यह भी जाने
- दरअसल भाजपा प्रवक्ता व वकील अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है कि जन प्रतिनिधित्व कानून अधिनियम की धारा-33 (7) के तहत प्रावधान है कि एक उम्मीदवार दो सीटों से चुनाव लड़ सकता है।
- वहीं धारा-70 कहती है कि दो सीटों से चुनाव लड़ने के बाद अगर उम्मीदवार दोनों सीटों पर विजयी रहता है तो उसे एक सीट से इस्तीफा देना होगा क्योंकि वो एक सीट ही अपने पास रख सकता है।
- पहले कोई उम्मीदवार कितनी भी जगह से चुनाव लड़ सकता था, लेकिन 1996 में सोच-समझकर इस प्रावधान में संशोधन कर एक उम्मीदवार के अधिकतम दो जगहों से चुनाव लड़ सकने की मंजूरी दी गई है। सरकार ने भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की उस याचिका का विरोध किया है जिसमें एक उम्मीदवार को दो जगहों से चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की गुहार की गई है।
- कानून एवं न्याय मंत्रालय के उपसचिव केके सक्सेना की ओर से सौंपे गए शपथ पत्र पर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ विचार करेगी। शपथ पत्र में कहा गया है कि भाजपा नेता अश्वनी कौर उपाध्याय द्वारा दायर याचिका बुनियादी अधिकार के उल्लंघन को प्रदर्शित करने में विफल है।
चुनाव आयोग के प्रस्ताव को विधि आयोग का भी समर्थन
- इससे पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि उम्मीदवारों पर एक से अधिक सीट से लड़ने पर पाबंदी होनी चाहिए। इसके लिए जन प्रतिनिधि कानून में संशोधन किया जाना चाहिए। आयोग ने कहा था कि वर्ष 2004 और 2016 में केंद्र सरकार को भेजे अपने प्रस्ताव में उसने अपना यह रुख स्पष्ट किया था। आयोग का कहना है कि एक उम्मीदवार के दो सीटों से चुनाव लड़ने से राजस्व का बेवजह नुकसान होता है और मतदाताओं के साथ अन्याय होता है। आयोग ने कहा कि उसके इस रुख का समर्थन विधि आयोग ने अपनी 255वीं रिपोर्ट में किया है।